फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rishikesh News : ‘धर्म’ से दूर हुईं धर्मशालाओं की होगी जांच, हरकत में आया निगम प्रशासन

Tue, 19 Jan 2021 03:51 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal विनोद मुसान, अमर उजाला, ऋषिकेश
विज्ञापन
तीर्थनगरी ऋषिकेश - फोटो : File Photo
विज्ञापन

तीर्थनगरी ऋषिकेश में धर्म के नाम पर संचालित कुछ धर्मशालाओं में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। इन धर्मशालाओं को जिन उद्देश्यों के लिए स्थापित किया गया था, ऐसी कोई गतिविधि इनमें संचालित नहीं हो रही है।

विज्ञापन


इससे इतर बड़े पैमाने पर इनका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, कुछ धर्मशालाओं को खुर्दबुर्द कर दिया गया है या करने की तैयारी है। ऐसी तमाम शिकायतों का संज्ञान लेते हुए अब नगर निगम प्रशासन इन धर्मशालाओं की जांच कराने जा रहा है। पहले चरण में नगर की छह धर्मशालाओं को चिह्नित किया गया है। गड़बड़ी की शिकायत सही पाए जाने पर इन धर्मशालाओं को नगर निगम में सम्मिलित किया जा सकता है। 

नगर निगम प्रशासन ने पहले चरण में नगर में स्थापित छह धर्मशालाओं की सूची तैयार की है। मुख्य नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल की ओर से इन धर्मशालाओं की जांच सहायक नगर आयुक्त एलएम दास को सौंपी गई है। इसमें कहा गया है कि नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत कुछ धर्मशालाएं अवैध रूप से संचालित हो रही हैं। कुछ धर्मशालाओं को खुर्दबुर्द करने की भी शिकायत मिली है। जिन छह धर्मशालाओं की जांच की बात कही जा रही है, इनमें लाजपत राय मार्ग स्थित नारायणी माई धर्मशाला की लीज समाप्त हो गई है। दूसरी चंद्रेश्वर मार्ग स्थित कानपुर वाली धर्मशाला है, जिसमें किसी बृज मोहन सक्सेना नाम के व्यक्ति का बोर्ड लगा हुआ है।
विज्ञापन


साफ है कि इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। तीसरा मामला चंद्रेश्वर मार्ग स्थित अनाथरक्षा आश्रम का है। इसके बारे में कहा जा रहा है कि इस आश्रम को कुछ लोगों द्वारा खुर्दबुर्द करने की कोशिश की जा रही है। चौथा मामला मेन बाजार दया स्टांप के पास महादेव वाली धर्मशाला का है। इसके बारे में कहा जा रहा है कि इस धर्मशाला में कुछ लोग गलत तरीके से काबिज हैं। पांचवां मामला घाट रोड मारवाड़ी भोजनालय के सामने नजीबावाद वाली धर्मशाला है। यहां भी कुछ अवैध रूप से काबिज हैं। छठा मामला हरिद्वार रोड स्थित नानकी माई धर्मशाला का है, यहां भी कुछ लोग अवैध रूप से कब्जा कर रह रहे हैं। 

नगर निगम के मुख्य नगर आयुक्त नरेंद्र सिंह क्वीरियाल की ओर से सहायक नगर आयुक्त एलम दास को सौंपी गई जांच में स्पष्ट कहा गया है कि जांच के दायरे में आई इन धर्मशाला के तथाकथित प्रबंधकों से यथाशीघ्र स्वामित्व के प्रमाण और अभिलेख मंगवाकर उनकी जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। 

नगर में संचालित कुछ धर्मशालाओं के बारे में हमें तमाम तरह की शिकायतें प्राप्त हुईं थीं। उसी आधार पर जांच की जा रही है। इन धर्मशालाओं के बारे में कहा जा रहा है कि जिन उद्देश्यों के लिए इन्हें बनाया गया था, वे कार्य छोड़कर बाकी सभी कार्य यहां किए जा रहे हैं। नगर निगम जांच के बाद अपनी रिपोर्ट मंडलायुक्त को प्रेषित करेगा। संभव है कि इस मामले में एसआईटी का गठन कर विस्तृत जांच की जाए। जांच में यदि शिकायत सही पाई जाती है तो इन बेमानी धर्मशालाओं को नगर निगम में सम्मिलित करने की कार्रवाई की जाएगी। 
-नरेंद्र सिंह क्वीरियाल, मुख्य नगर आयुक्त 

हम धर्मशालाओं को उनके पुराने स्वरूप में लाने के लिए वचनबद्ध हैं। इसका उल्लेख अपने चुनावी घोषणापत्र में भी किया था। धर्मशालाएं तीर्थनगरी की पहचान रही हैं, जहां तीर्थयात्री और श्रद्धालु आकार निशुल्क रुकते थे और फिर अपनी आगे की यात्रा पर निकल जाते थे, लेकिन पूर्व में दानदाताओं द्वारा बनाई गई इन धर्मशालाओं पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। कुछ धर्मशालाओं को खुर्दबुर्द कर होटल का स्वरूप दे दिया। यह काम पिछले 15 सालों में बहुत तेजी से हुआ है। अब इन सबकी जांच की जाएगी। जो भी धर्मशालाएं नियम विरुद्ध संचालित होती पाई जाएंगी या जिनमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, सभी पर विधिक राय लेकर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन

-अनिता ममगाईं, मेयर नगर निगम

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें