देहरादून स्थित जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए जमीन देने से पहले राज्य सरकार ने एयरपोर्ट ऑथिरिटी ऑफ इंडिया के सामने एक शर्त रखी है। शर्त के अनुसार सरकार ऑथिरिटी को जमीन तभी ट्रांसफर करेगी, जब उनके पास प्लानिंग डिपार्टमेंट का अप्रूवल होगा। सरकार का तर्क है कि कई बार जमीन ट्रांसफर होने के बाद विभाग उसे दबाकर बैठ जाते हैं।
दरअसल नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर ट्रैफिक का भारी दबाव है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ने के कारण वहां दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। जबकि आस-पास विस्तारीकरण की संभावना बेहद कम है। इसको देखते हुए एयरपोर्ट ऑथिरिटी ऑफ इंडिया इसके आस-पास के हवाई अड्डों का विस्तारीकरण कर विकसित करने की योजना बना रही है।
जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर डायरेक्ट्रेट एयरपोर्ट ने प्रस्ताव दिया है, जिसे ऑथिरिटी को भेजा जाना है।
एयरपोर्ट के लिए 350 एकड़ जमीन मांगी गई है। सरकार के पास एयरपोर्ट से लगी हुई पर्याप्त भूमि उपलब्ध भी है। हालांकि बिना नियोजन विभाग की अनुमति मिले सरकार यह भूमि ट्रांसफर करने के मूड में नहीं है। एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध है लेकिन कर्मियों के लिए आवासीय व्यवस्था नहीं है।
राज्य सरकार को देनी होती है जमीन
एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए जमीन संबंधित राज्य सरकार को उपलब्ध करानी होती है। सरकारी जमीन मुफ्त ट्रांसफर की जाती है। जबकि फॉरेस्ट लैंड पर पेड़ लगाने व रख-रखाव का खर्च देना होता है। लोगों की जमीन पर पुनर्वास का खर्च वहन करना होगा।
एयरपोर्ट विस्तारीकरण के लिए जितनी जमीन मांगी गई है, वह हमारे पास उपलब्ध है। लेकिन सरकार प्लानिंग डिपार्टमेंट से अप्रूवल मिलने के बाद ही लैंड ट्रांसफर करेगी।
-आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, नागरिक उड्डयन