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UPSC Result 2018: बचपन से जिस विषय को पूरी चाहत से पढ़ा, उसी ने हिमाद्री को बना दिया आईएएस

Sun, 07 Apr 2019 06:14 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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हिमाद्री - फोटो : अमर उजाला
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बचपन से जिस विषय को पूरी चाहत से पढ़ा, उसी विषय ने हिमाद्री को दो बार सिविल सेवा परीक्षा में सफलता दिलाई। हिमाद्री ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 97वीं रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी पूरी पढ़ाई में अर्थशास्त्र को नहीं छोड़ा।

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राजपुर रोड एनक्लेव निवासी मर्चेंट नेवी के पूर्व चीफ इंजीनियर राजीव कौशिक की इकलौती बेटी हिमाद्री कौशिक ने सिविल सेवा परीक्षा में दूसरी बार सफलता हासिल कर इतिहास रचा है।

उनकी इस सफलता में एक ऐसा विषय है, जिसने मुकाम तक पहुंचाया। पिता राजीव ने बताया कि कक्षा सात से हिमाद्री को अर्थशास्त्र पढ़ना बहुत अच्छा लगता था। 10वीं ब्राइटलैंड स्कूल से की। इसमें उन्होंने 98.7 प्रतिशत अंक हासिल किए।

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उसके बाद जयपुर से 97.3 प्रतिशत अंक हासिल कर 12वीं की परीक्षा पास की। दोनों परीक्षाओं के दौरान भी हिमाद्री ने अर्थशास्त्र का साथ नहीं छोड़ा। उसके बाद बिट्स पिलानी गोवा से केमिकल इंजीनियरिंग और एमएससी इकोनोमिक्स की ड्यूल डिग्री हासिल की।

हिमाद्री का सफर यहीं नहीं रुका। उन्हें सिविल सेवा के क्षेत्र में जाना था तो तैयारी में जुट गई। पहले प्रयास में सफलता नहीं मिली। दूसरे प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा पास की। इन दिनों वह नागपुर में बतौर असिस्टेंट कमिश्नर इनकम टैक्स प्रशिक्षण हासिल कर रही हैं।

पिता राजीव कौशिक ने कहा कि वह जॉब के सिलसिले में हमेशा बाहर रहे। लिहाजा, हिमाद्री की मां ललिता कौशिक ने उसकी परवरिश की। इकलौती संतान को पढ़ाया और आज बेटी ने नाम रोशन किया है तो उन्हें अपनी मेहनत और बेटी पर नाज है।
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होने वाले पति भी हैं आईएएस
हिमाद्री जल्द विवाह के बंधन में बंधने जा रही हैं। उनके होने वाले पति आयुष सिन्हा भी हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। आयुष ने गत वर्ष सिविल सेवा परीक्षा में पूरे देश में सातवीं रैंक हासिल की थी। 

इकोनोमिक्स में हमेशा 98 प्रतिशत अंक
हिमाद्री और अर्थशास्त्र का साथ करीब 12 साल पुराना है। खास बात यह भी है कि हिमाद्री ने हमेशा इस विषय में 98 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। फिर चाहे वह 10वीं हो या 12वीं। अर्थशास्त्र में रुचि के चलते उन्होंने एमएससी इकोनोमिक्स को चुना।

दादा की खुशी का नहीं ठिकाना
हिमाद्री की दूसरी सफलता से उनके दादा डॉ. जेपी शर्मा बेहद खुश हैं। डॉ. शर्मा दून अस्पताल से रिटायर्ड हैं। उनका कहना है उनकी पोती ने न केवल उनका बल्कि प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्हें अपनी बच्ची पर गर्व है।
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