कई अधिकारी संदेह के घेरे में
यूपीसीएल का नियम है कि उपभोक्ताओं से जो भी सिक्योरिटी राशि जमा कराई जाती है, उसकी डिमांड लिस्ट बनाकर ई-मेल से यूपीसीएल मुख्यालय को आती है। यहां से एप्रूवल के बाद लिस्ट वापस डिवीजन चली जाती है। वहां से बैंक को भेज दी जाती है और उपभोक्ताओं के खातों में वह पैसा जमा हो जाता है। महिला कर्मचारी जो सूची बनाकर यूपीसीएल को भेजती थी, वह एप्रूवल के बाद बैंक भेजने से पहले बदल देती थी। सवाल ये उठ रहे कि सूची बैंक या मुख्यालय में तभी वैध मानी जाती है, जबकि उस पर अधिशासी अभियंता व अकाउंटेंट के हस्ताक्षर हों। महिला कर्मचारी जो सूची बदलकर बैंक भेजती थी, उसमें भी अधिशासी अभियंता व अकाउंटेंट के हस्ताक्षर होते थे। लिहाजा, कई अधिकारी भी सवालों के घेरे में आ रहे हैं।
इतनी राशि होती है जमा
एलटी कनेक्शन-1000 रुपये
एचटी कनेक्शन-10,000 रुपये
यूपीसीएल कराएगा स्पेशल ऑडिट
यूपीसीएल के निदेशक संचालन एमएल प्रसाद ने कहा, मामले का स्पेशल ऑडिट कराएंगे, ताकि स्पष्ट हो सके कि कुल कितनी रकम का गबन हुआ है। कहा, मामले के जो भी जिम्मेदार अधिकारी होंगे, मुख्यालय स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
ऋषिकेश के बिजली अधिकारी-कर्मचारी वर्षों से जमे
ऋषिकेश विद्युत वितरण खंड में तबादले के सीजन का कोई असर नजर नहीं आता। यहां अधिकारियों से लेकर कर्मचारी लंबे समय से जमे हुए हैं।सूत्रों के मुताबिक, ऋषिकेश में वर्षों से काबिज अधिकारी-कर्मचारी राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल करते जमे हैं।
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पहले चोरी करो, पकड़े जाओ तो जमा करा दो
पिछले कुछ वर्षों में गबन के कई मामले अलग-अलग डिवीजन में सामने आते रहे हैं। ज्यादातर मामलों में कर्मियों से पैसा वापस जमा करा लिया जाता है और कार्रवाई से बचते रहे हैं। इससे पूर्व हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जबकि नियमानुसार सरकारी पैसे का गबन करने वालों पर कानूनी व विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए।