बिजली विभाग के तीनों निगमों के अधिकारियों और कर्मचारियों को सस्ती बिजली देने और आम जनता के लिए बिजली की दरें बढ़ाने के मामले में उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन (यूपीसीएल) के एमडी सोमवार को हाईकोर्ट में पेश हुए।
एमडी ने हाईकोर्ट में शपथपत्र दायर कर कहा एक माह के भीतर बिजली विभाग के सभी कर्मचारियों के घरों में बिजली के मीटर लगवा दिए जाएंगे। एमडी ने माना कि विभाग में अनियमितताएं हुईं हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक माह के भीतर अनियमितताओं की जांच कर ली जाएगी। यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक कर्मचारियों का एक माह का वेतन रोक दिया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून के आरटीआई क्लब ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ऊर्जा निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों से एक माह का बिल मात्र 400 से 500 रुपये ले रही है। वहीं, अन्य कर्मचारियों से बिल के रूप में सिर्फ 100 रुपये लिए जाते हैं, जबकि इनका बिल लाखों में आता है। याचिका में कहा गया कि इसका बोझ सीधे जनता पर पड़ रहा है।
याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदेश में कई अधिकारियों के घर बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं और जो लगे भी हैं, वे खराब स्थिति में हैं। कॉरपोरेशन ने वर्तमान कर्मचारियों के अलावा, रिटायर और उनके आश्रितों को भी बिजली मुफ्त में दी है। याचिका में कहा गया कि उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश घोषित है लेकिन यहां हिमाचल से महंगी बिजली है, जबकि वहां बिजली का उत्पादन तक नहीं होता। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि घरों में लगे मीटरों का किराया पॉवर कॉरपोरेशन कब का वसूल कर चुका है।