बड़े बकायादारों पर यूपीसीएल दरियादिली दिखा रहा है। कई डिफाल्टर तो तीन से पांच साल से लाखों की रकम पर कुंडली मारे बैठे हैं। फिर भी यूपीसीएल उनके कनेक्शन नहीं काट रहा है।
विद्युत टैरिफ में बढ़ोतरी को लेकर जन सुनवाई के दौरान उपभोक्ताओं ने बड़े बकायेदारों पर कार्रवाई न किए जाने का मुद्दा उठाया था। लोगों का तर्क था कि करोड़ों रुपये का बकाया जमा न होना भी यूपीसीएल के घाटे का कारण है।
यूपीसीएल घाटे को आयोग को भेजे जाने वाले टैरिफ में जोड़ देता है। जिसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को विद्युत दरों में बढ़ोतरी के रूप में झेलना पड़ता है।इस पर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को जरूरी दिशानिर्देश दिए थे और विद्युत बिल वसूली व बड़े बकायेदारों के नाम सार्वजनिक करने को कहा था।
इसके बाद यूपीसीएल ने बकायेदारों की सूची तो जारी कर दी, लेकिन उनके विद्युत कनेक्शन काटने में वह दरियादिली दिखा रहा है। पांच लाख रुपये से अधिक के बिजली बिल बकायेदारों में करीब 50 से अधिक औद्योगिक इकाइयों के संचालक और सरकारी विभाग शामिल हैं। विद्युत बिल की छोटी-छोटी रकम और कुछ दिन की देरी पर आम उपभोक्ताओं के कनेक्शन काटने वाले यूपीसीएल की बड़े बकायेदारों पर यह दरियादिली सवालों के घेरे में है।
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक एमके जैन ने बताया कि उन बकायेदारों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है, जिन्होंने सालों से बिल जमा नहीं कराया है। उनके कनेक्शन का स्थायी विच्छेदन कर जिला प्रशासन के माध्यम से वसूली की जाती है। यह कार्रवाई भी अमल में लाई जा रही है।