- दो साल में ट्रांसफार्मर की क्षति दर में हुआ 35 फीसदी का सुधार
- पूर्वानुमान आधारित निगरानी से पहले ही नियंत्रण में हो रहे हालात
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। यूपीसीएल ने दावा किया है कि उच्च दक्षता के ट्रांसफार्मर से बिजली आपूर्ति की व्यवस्था मजबूत हो रही है। निगम प्रबंधन के मुताबिक, दो साल के भीतर ट्रांसफार्मरों की क्षति की दर में करीब 35 फीसदी का सुधार दर्ज किया गया है।
यूपीसीएल के एमडी अनिल कुमार ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में वितरण ट्रासफार्मर क्षति दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2022-23 में जहां औसत क्षति दर 5.75% थी, यह 2024-25 में घटकर 3.91% रह गई, जो लगभग 32% सुधार को दर्शाती है। गढ़वाल, हरिद्वार, कुमाऊं और रुद्रपुर जोन में क्षति दर में निरंतर गिरावट दर्ज की गई है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में अक्तूबर 2025 माह तक यह दर और घटकर मात्र 3.01% पर आ गई है। यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि 2023-24 और 2024-25 के दौरान एक भी पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त नहीं हुआ, जो यूपीसीएल की उन्नत सुरक्षात्मक प्रणाली, प्रेडिक्टिव ऑपरेशन और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। एमडी अनिल कुमार ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर क्षति में कमी का प्रत्यक्ष लाभ राज्य के घरेलू उपभोक्ताओं, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों व औद्योगिक इकाइयों को प्राप्त हुआ है। कम ट्रांसफॉर्मर खराब होने से आपूर्ति बाधित होने की घटनाओं में कमी आईं। जिससे उपभोक्ताओं को अधिक स्थिर वोल्टेज, कम ट्रिपिंग और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली मिल रही है। ग्रामीण व पर्वतीय क्षेत्रों में भी अब बेहतर निगरानी, समयबद्ध तकनीकी हस्तक्षेप एवं संसाधनों की उपलब्धता के कारण कटौती की आवृत्ति व अवधि दोनों में कमी आई है।
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पूर्वानुमानित रखरखाव से दिखे बेहतर नतीजे
यूपीसीएल प्रबंधन के मुताबिक, उन्होंने ट्रांसफॉर्मर क्षति को कम करने के लिए कई आधुनिक तकनीकी उपाय अपनाए हैं। प्रिडेक्टिव मेंटिनेंस सिस्टम के माध्यम से ट्रांसफॉर्मर लोड, ऑयल क्वालिटी और वोल्टेज प्रोफाइल की सतत निगरानी की जा रही है, जिससे संभावित दोषों की पूर्व पहचान संभव हो पाती है। आधुनिक तकनीक आधारित बेहतर लोड फोरकास्टिंग से ओवरलोडिंग की संभावना पहले ही पहचान ली जाती है, जिससे समय रहते क्षमता वृद्धि, टैप ऑप्टिमाइजेशन या नेटवर्क रीडिस्ट्रिब्यूशन किया जा सके। कई क्षेत्रों में एबी केबल के उपयोग से फॉल्ट घटनाओं में कमी आई है जबकि सबस्टेशनों में आरटीडीएएस और स्काडा आधारित मॉनिटरिंग ने फॉल्ट आइसोलेशन व तेज बहाली को अधिक प्रभावी बनाया है।