उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में दो साल के दौरान सिविल कार्यों के नाम पर जमकर पैसे बहाया गया। वर्ष 2018-19 में निगम ने मेंटेनेंस के नाम पर 17 करोड़ से अधिक धन खर्च कर दिया गया है। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी बिजली व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है और न ही उपभोक्ताओं को इसका कोई लाभ ही मिल पाया है।
यूपीसीएल में तत्कालीन प्रबंध निदेशक के कार्यकाल के दौरान मेंटेनेंस के नाम पर बड़ा खेल खेला गया। अकेले ऊर्जा भवन परिसर में ही इन दो वर्षों में मेंटेनेंस और रखरखाव के नाम पर पांच करोड़ से अधिक धन व्यय किया गया। इस दौरान बिजली सब स्टेशनों में चारदीवारी, स्वीचिंग स्टेशन, नियंत्रण कक्ष, निशान शेड और आवासीय भवनों की मरम्मत का काम चला। डिवीजन और सब डिवीजनों में कॉन्फ्रेंस हालों का मेंटेनेंस और निर्माण के साथ ही टाइल, पत्थर लगाए गए। सिविल कार्यों पर पिछले दो सालों में 17.56 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए।
आरटीआई में यह मामला प्रकाश में आया। आरटीआई में ऊर्जा निगम ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए उसमें 33 केवी सब स्टेशन पर चारदीवारी और आवासी भवनों पर 37.68 लाख रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा 33 केवी उप संस्थान बागवान टिहरी में 250 मीटर चारदीवारी व अन्य कार्यों पर 18.63 लाख, उप संस्थान कोटद्वार में बाउंड्रीवॉल समेत दूसरे सिविल कार्यों पर 25.16 लाख, चौरास कीर्तिनगर में सिविल कार्यों पर 80 लाख रुपये खर्च होने बताए गए हैं।
विद्युत वितरण खंड ग्रामीण देहरादून के अंतर्गत 33 केवी सबस्टेशन मोहनपुर में इंटरलॉकिंग टाइल्स, पार्किंग, गेट और रैंप पर 21.06 लाख, रुड़की में उप संस्थान-6 में एक रूम पर 36.24 लाख रुपये, उपसंस्थान अनारवाला देहरादून में फर्श में टाइल्स और छत के ट्रीटमेंट पर 20.62 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। सिविल कार्यों के नाम पर हुई फिजूलखर्ची पर निगम में ही आवाज उठी, लेकिन उन्हें दबा दिया गया है। अब जबकि निगम में नए एमडी की नियुक्ति हुई है। ऐसे में देखना यह होगा कि निगम में इस प्रकार के फिजूलखर्चों की जांच होगी या नहीं।
मामला पुराना है, मेरे आने से पहले का है, मेरे संज्ञान में भी नहीं है। अगर कोई शिकायत करता है तो मामले की जांच कर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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नीरज खैरवाल, एमडी, यूपीसीएल