अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सहदेव सिंह की अदालत ने उत्तर प्रदेश के सपा विधायक मनोज पारस की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। सपा विधायक ने गत 14 नवंबर को पौड़ी में एसीजेएम कोर्ट में आत्मसमर्पण किया था।
बचाव पक्ष की ओर से विधायक की जमानत याचिका जिला एवं सत्र न्यायालय में दाखिल की गई थी, जिसे डीजे कोर्ट ने एडीजे कोर्ट को ट्रांसफर कर दिया था। शासकीय अधिवक्ता नसीम बेग ने बताया कि मनोज पारस वर्तमान में यूपी की नगीना सीट से विधायक हैं।
उन पर कुछ साथियों संग मिलकर 17 जनवरी, 2013 की रात को लक्ष्मणझूला के एक होटल में ठहरे जिला पंचायत सदस्यों के कमरों में जबरन घुसकर उनके साथ मारपीट, गाली गलौज और अपहरण का आरोप है।
उनके खिलाफ थाना लक्ष्मणझूला में बिजनौर के जिला पंचायत सदस्यों के अपहरण सहित विभिन्न धाराओं में केस दर्ज हुआ था। इस मामले में कोर्ट ने सपा विधायक मनोज पारस के खिलाफ वारंट जारी किए थे।
उत्तराखंड पुलिस मनोज पारस की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही थी। गत मंगलवार को मनोज पारस ने सीजेएम पौड़ी की अदालत में सरेंडर करते हुए जमानत याचिका प्रस्तुत की थी।
इस मामले में सपा सरकार में मंत्री रहे मूलचंद चौहान, उनके बेटे अमित चौहान, कपिल, रजा अली परवेज, पूर्व जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन, शेरबाज पठान, पूर्व सपा सांसद नगीना यशवीर धोबी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नसरीन सैफी के पति रफी सैफी आदि सपा नेताओं को भी कोर्ट में सरेंडर करना पड़ा था। बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई।
शुक्रवार को एडीजे कोर्ट ने विधायक मनोज पारस की जमानत याचिका पर सुनवाई की, जिसका अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया। शासकीय अधिवक्ता नसीम बेग ने बताया कि बचाव पक्ष की ओर से विधायक की जमानत के लिए दाखिल पत्रावलियों को कोर्ट ने अपर्याप्त आधार माना।
हाईकोर्ट ने विधायक को दो सप्ताह के अंदर सरेंडर के आदेश दिए थे, लेकिन वे कोर्ट में पेश नहीं हुए। विधायक की ओर से शुक्रवार को बीमारी की बात कहकर मेडिकल भी दाखिल किया गया, जिसे कोर्ट ने नहीं माना और जमानत याचिका खारिज कर दी।