उत्तराखंड में कई अप्रशिक्षित वायरमैन घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली की लाइन लगाने का काम कर रहे हैं। चालू लाइनों में खराबी होने पर ये उनकी रिपेयरिंग भी करते हैं। विद्युत सुरक्षा विभाग इसे खुद ही सुरक्षा से खिलवाड़ मानता है। बावजूद इसके इन वायरमैनों को जरूरी प्रशिक्षण देकर परमिट नहीं दिए जा रहे हैं।
दरअसल, गैर आईटीआई धारकों को विद्युत सुरक्षा विभाग भवन के अंदर वायरिंग या विद्युत तार, साकेट आदि में खराबी को ठीक करने की इजाजत नहीं देता है। विद्युत सुरक्षा नियमों के मुताबिक, इसे गैर कानूनी माना जाता है। प्रदेश में ऐसे कई लोग वायरमैन के रूप में काम कर रहे हैं, जो आईटीआई धारक नहीं हैं।
हालांकि विभाग का मानना है कि इन्हें कुछ जरूरी प्रशिक्षण दिया जाए तो ये दक्ष वायरमैन की श्रेणी में आ सकते हैं। साथ ही, सरकारी प्रतिष्ठानों में भी वायरिंग का काम ले सकते हैं। इसके लिए पिछले साल विद्युत सुरक्षा विभाग ने बाकायदा ऐसे वायरमैन को पंजीकरण करने के लिए आवेदन मांगे थे।
गढ़वाल जोन में 150 से अधिक आवेदन मिले। इन आवेदकों की परीक्षा के बाद पास होने वाले वायरमैन को जरूरी प्रशिक्षण देकर नियमानुसार, वायरमैन परमिट जारी होने थे। आवेदन आने के बावजूद लंबे समय से विभाग गढ़वाल जोन में यह परीक्षा नहीं करा पा रहा है। गढ़वाल जोन के विद्युत सुरक्षा अधिकारी आरपी कोटनाला ने बताया कि यह परीक्षा जल्द कराई जाएगी।