भाजपा का कहना है कि रामलीला मंचन हो तो उसमें नियम-कायदे नहीं टूटने चाहिए। सीमित संख्या में आयोजन की अनुमति दी जा सकती है। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष व प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. देवेंद्र भसीन कहते हैं ‘जान है तो जहान है’। सबसे ज्यादा जरूरी लोगों का स्वास्थ्य और जीवन है। अनलॉक पांच में सरकार ने रियायतें दी हैं, लेकिन उनमें कुछ शर्तें भी शामिल हैं। हर हाल में केंद्र और राज्य सरकार की गाइडलाइन का पालन होना चाहिए।
नियमों के पालन के साथ हों रामलीलाएं : आप
आम आदमी पार्टी के प्रधएश अध्यक्ष एसएस कलेर का कहना है कि रामलीला, भगवान राम से जुड़े करोड़ों हिंदुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। रामलीला शुरू हो , लेकिन सरकार को जनता को पूरी सुरक्षा का विश्वास दिलाना पड़ेगा। यहां भी सोशल डिस्टेंस, सैनिटाइजेशन और तमाम उन गाइडलाइंस का अनुसरण किया जाए जो कोविड को लेकर रखे गए हैं। बाकी सरकार की जिम्मेदारी हर उस परिवार को लेकर है जो परेशान है।
दो-दो सौ का ब्लाक बनाकर कराई जाए रामलीला : हरीश रावत
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, पंजाब के प्रभारी और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि रामलीला का मंचन अवश्य होना चाहिए। मंचन में आने वाली भीड़ को रोका नहीं जा सकता। रामलीला कमेटियों को चाहिए कि दो-दो सौ के ब्लाक बनाकर लोगों को रामलीला मंचन देखने के लिए आने दिया जाए। पुलिस और रामलीला कमेटी सामाजिक दूरी का पालन कराएं। ब्लाक बनाकर ऐसा करना संभव है।
अल्मोड़ा : कर्नाटकखोला में होगी वर्चुअल रामलीला
कोरोना महामारी को देखते हुए अल्मोड़ा में कर्नाटकखोला में ही वर्चुअल रामलीला का आयोजन किया जाएगा, बाकी जगह रामलीला नहीं होगी। रावण का पुतला बनाया जाएगा, जिसे दशहरा के दिन माल रोड में टैक्सी स्टैंड के निकट जलाया जाएगा। इसमें भी आम लोगों की भागीदारी नहीं होगी।
ऊंचापुल रामलीला के ‘दशरथ’ नासाज, इस बार नहीं निभाएंगे किरदार
रामलीला के मंचन को अनुमति मिलने पर सस्पेंस है। लेकिन सस्पेंस हल्द्वानी के ऊंचापुल की रामलीला के दशरथ को लेकर भी है। कोरोना संक्रमण के कारण दशरथ नासाज हैं। आवाज बेशक अब भी उतनी ही खनकदार है, लेकिन संक्रमण के कारण काया कुछ कमजोर हो चुकी है। यहां जिक्र भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का हो रहा है।
भगत हाल ही में कोरोना से जंग जीते हैं। राजनीति में सक्रिय भी हो चुके हैं। लेकिन अब उन्हें स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने के लिए खास एहतियात बरतनी पड़ रही है। राजनीति के साथ भगत की हल्द्वानी की रामलीला में अलग अलग चरित्र निभाने को लेकर भी ख्याति है। रामलीला से उनका अटूट रिश्ता है। वे पिछले चार दशक से लगातार रामलीला में कोई न कोई किरदार निभाते आ रहे। पिछले करीब 25 साल से वह दशरथ का चरित्र निभा रहे हैं।
श्री ग्रामीण रामलीला कमेटी से जुड़ा करीब 100 लोगों के परिवार के लिए वह आज दशरथ हैं। भगत कहते हैं, उम्र के साथ मेरे चरित्र बदलते गए। कभी मैं अंगद बना, फिर परशुराम बना और अब दशरथ का पाठ करता हूं। बढ़ती उम्र के साथ उनके चरित्र भी बदलते गए। अब वह दशरथ का पर्याय बन चुके हैं।
मगर इस बार रामलीला के आयोजन पर ही संदेह कि वह होगी कि नहीं। भगत कहते हैं, यदि आयोजन होता है तो वह शायद ही दशरथ का चरित्र निभा पाएं। इसकी वजह कोरोना है, जिसकी चपेट में वह पिछले दिनों आए। बेशक वे कोरोना से जंग जीत चुके हैं, लेकिन संवाद बोलने के लिए जितनी ताकत चाहिए, उतनी अभी नहीं है।