प्रसाद योजना यह भी बताती है कि स्थानीय बाजार कैसे पनप सकता है। स्थानीय उत्पाद चौलाई के लड्डू बनाए गए तो चौलाई उगाने वालों को बेहतर दाम मिले और खासी मात्रा में चौलाई खरीदी भी गई।
ऑनलाइन प्रसाद देने की योजना पर भी काम
ऑनलाइन प्रसाद की योजना पर भी काम किया जा रहा है। यहां भी यह पहल की जा सकती है। स्थानीय हवन सामग्री, जड़ी बूटी, चौलाई आदि के उपयोग की भी कोशिश है। बदरीनाथ में माणा के स्वयं सहायता समूह ने यह प्रयोग किया भी है। स्थानीय स्तर पर इस योजना में दूरदराज की ग्रामीण महिलाओं को बेहतर आय देने की क्षमता है।
- कपिल उपाध्याय, विपणन विशेषज्ञ
इन मंदिरों में है प्रसाद की योजना
अल्मोड़ा- जागेश्वर
चमोली-बदरीनाथ, गोपीनाथ
रुद्रप्रयाग-केदारनाथ, कोटेश्वर
उत्तरकाशी-विश्वनाथ, गंगोत्री
टिहरी-सुरकंडा
पौड़ी -ज्वाल्पा देवी
इन मंदिरों में किया जाएगा शुरू
अल्मोड़ा-चितई
बागेश्वर-बागनाथ, बैजनाथ
चमोली-कर्णप्रयाग
रुद्रप्रयाग-त्रिजुुगीनारायण
उत्तरकाशी-यमुनौत्री
पिथौरागढ़-मौस्टमानू, थलकेदार
टिहरी-कुंजापुरी
देहरादून-महासू
पौड़ी-सिद्धबली, नीलकंठ