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मां पूर्णागिरि धाम : बढ़ने लगी आवक, फिलहाल उत्तराखंड के ही श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन

Thu, 11 Jun 2020 01:28 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
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पूर्णागिरि मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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मां पूर्णागिरि धाम के कपाट खुलने के बाद मां के दरबार में श्रद्धालुओं की आवाजाही का सिलसिला चल पड़ा है। राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप फिलहाल उत्तराखंड के श्रद्धालुओं को ही दर्शन की अनुमति दी गई है। बुधवार को चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिले के 50 से अधिक श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे।

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केंद्र सरकार की अनुमति के बाद ही मां पूर्णागिरि धाम के कपाट आठ जून को विधिवत खोल दिए गए थे। पहले दिन नवाबगंज से एकमात्र युवक दर्शन के लिए पहुंचा था। कपाट खुलने के दूसरे दिन मंगलवार को भी करीब एक दर्जन श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे लेकिन अब श्रद्धालुओं की आवक बढ़ गई है।

मंदिर समिति अध्यक्ष पं. भुवन चंद्र पांडेय ने बताया कि बुधवार को बनबसा, खटीमा, सितारगंज, नानकमत्ता आदि क्षेत्रों से आए पचास से अधिक श्रद्धालु देवी मां के दर्शन के लिए पहुंचे, जिन्हें सामाजिक दूसरी बनाकर गाइडलाइन के अनुरूप दर्शन कराए गए। उन्होंने बताया कि मंदिर में सैनिटाइजेशन की भी व्यवस्था की गई है। 
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दो श्रद्धालुओं ने दी बकरे की प्रतीकात्मक बलि 

बुधवार को श्रद्धालुओं की दो टोलियों ने काली मंदिर में वचन की प्रतीकात्मक बलि भी चढ़ाई। धाम में बलि प्रथा पर प्रतिबंध लगने के बाद से बलि के लिए बकरे लेकर आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा अब काली मंदिर में बकरे के बाल चढ़ाकर प्रतीकात्मक बलि चढ़ाई जाती है।  

पहचानपत्र को देखकर दी जा रही दर्शन की अनुमति  

पूर्णागिरि दर्शन को आ रहे श्रद्धालुओं को उनका परिचयपत्र देखने के बाद ही दर्शन की अनुमति दी जा रही है। ठुलीगाड़ थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह ने बताया कि बूम और ठुलीगाड़ बैरियर पर पुलिस श्रद्धालुओं के पहचान पत्र चेक कर रही है। सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप उत्तराखंड से बाहर के श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

कपाट खुले, पर पुजारियों में नहीं उत्साह 

मां पूर्णागिरि धाम के कपाट भी खुल गए और श्रद्धालुओं की आवाजाही भी शुरू हो गई है, लेकिन धाम क्षेत्र की धर्मशाला चलाने वाले पुजारियों में इसे लेकर उत्साह नहीं है। कपाट खुलने के तीन दिन बाद भी ज्यादातर धर्मशालाएं बंद पड़ीं हैं।

धर्मशाला संचालक प्रकाश पांडेय उर्फ पीपी ने बताया कि भैरव मंदिर से लेकर काली मंदिर तक चुनिंदा धर्मशालाएं खुलीं हैं, जिससे श्रद्धालुओं को इन चुनिंदा धर्मशालाओं में ही विश्राम, स्नान आदि की सुविधाएं मिल रहीं हैं। उनका कहना है कि लॉकडाउन में सभी संचालक धर्मशालाओं को बंद घर चले गए हैं। अब मानसून नजदीक है। ऐसे में बंद पड़ी धर्मशालाओं के खुलने की उम्मीद कम है।
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