बुधवार को श्रद्धालुओं की दो टोलियों ने काली मंदिर में वचन की प्रतीकात्मक बलि भी चढ़ाई। धाम में बलि प्रथा पर प्रतिबंध लगने के बाद से बलि के लिए बकरे लेकर आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा अब काली मंदिर में बकरे के बाल चढ़ाकर प्रतीकात्मक बलि चढ़ाई जाती है।
पहचानपत्र को देखकर दी जा रही दर्शन की अनुमति
पूर्णागिरि दर्शन को आ रहे श्रद्धालुओं को उनका परिचयपत्र देखने के बाद ही दर्शन की अनुमति दी जा रही है। ठुलीगाड़ थाना प्रभारी लक्ष्मण सिंह ने बताया कि बूम और ठुलीगाड़ बैरियर पर पुलिस श्रद्धालुओं के पहचान पत्र चेक कर रही है। सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप उत्तराखंड से बाहर के श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
कपाट खुले, पर पुजारियों में नहीं उत्साह
मां पूर्णागिरि धाम के कपाट भी खुल गए और श्रद्धालुओं की आवाजाही भी शुरू हो गई है, लेकिन धाम क्षेत्र की धर्मशाला चलाने वाले पुजारियों में इसे लेकर उत्साह नहीं है। कपाट खुलने के तीन दिन बाद भी ज्यादातर धर्मशालाएं बंद पड़ीं हैं।
धर्मशाला संचालक प्रकाश पांडेय उर्फ पीपी ने बताया कि भैरव मंदिर से लेकर काली मंदिर तक चुनिंदा धर्मशालाएं खुलीं हैं, जिससे श्रद्धालुओं को इन चुनिंदा धर्मशालाओं में ही विश्राम, स्नान आदि की सुविधाएं मिल रहीं हैं। उनका कहना है कि लॉकडाउन में सभी संचालक धर्मशालाओं को बंद घर चले गए हैं। अब मानसून नजदीक है। ऐसे में बंद पड़ी धर्मशालाओं के खुलने की उम्मीद कम है।