याचिका में कहा गया था कि रमेश पोखरियाल निशंक ने अपने शपथपत्र में कई स्थान रिक्त छोड़ दिए थे। मुख्यमंत्री रहते हुए निशंक पर आवास का 2 करोड़ 7 लाख का बकाया है। इस पर उच्च न्यायालय तीन मई को रुलक संस्था की जनहित याचिका पर अपना निर्णय भी दे चुका है कि निशंक ने सरकार का बकाया भुगतान करना है।
याचिका में यह भी कहा गया था कि सांसद आवास का जो नोड्यूज जमा किया गया वो भी प्रोविजनल है। इसके अलावा, याचिका में यह भी कहा गया कि निशंक ने राज्य सरकार द्वारा आवंटित संपत्ति और शैक्षणिक योग्यता का विवरण भी नहीं दिया।