आचार्यकुलम की प्राचार्या वंदना मेहता और जाह्नवी के निर्देशन में आचार्यकुलम के छात्र-छात्राओें ने महर्षि दयानंद के जीवन पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ‘वेदों की ओर लौट चलो’ की प्रस्तुति दी। साथ ही योग नृत्य के माध्यम से योग की क्रियाएं प्रस्तुत की। रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति ने सभी को मोहित कर दिया।
आचार्यकुलम के वार्षिकोत्सव में स्वामी रामदेव ने भारतीय शिक्षा बोर्ड की स्थापना के अपने संकल्प को फिर दोहराया। उन्होंने कहा कि मैकाले ने हमारी प्राचीन वैदिक शिक्षा पद्धति को बदल दिया था। आज हम सबका दायित्व है कि मैकाले की शिक्षा पद्धति के स्थान पर वैदिक शिक्षा पद्धति की स्थापना की जाए। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास, पाखंड और जाति मुक्त भारत का सपना सबसे पहले महर्षि दयानंद ने देखा था।
उन्होंने ही हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में मान्यता दिलाई। उनके आदर्शों पर चलते हुए वेदों कोे आधार बनाकर हमें शिक्षा पद्धति में सुधार करना है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने स्वामी दयानंद सरस्वती को याद करते हुए कहा कि वह ऐसे योद्धा संन्यासी थे, जिन्होेंने सच्चे शिव को पाने और मृत्यु के रहस्य को जानने के लिए घर त्याग दिया था। महर्षि दयानंद ने गुरुकुलीय परंपरा की नींव रखी। इस गुरुकुलीय परंपरा को बचाने की जिम्मेदारी अब हमारे ऊपर है।