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Budget 2021: फिर टूटी ग्रीन बोनस की आस, सालाना करीब सात हजार करोड़ अनुदान की उम्मीद कर रहा था उत्तराखंड

Tue, 02 Feb 2021 09:58 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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बजट 2021 - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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चुनावी साल में भी उत्तराखंड को ग्रीन बोनस मिलने की आस पूरी नहीं हो पाई है। पिछले कई वर्षों से पर्यावरणीय सेवाओं के बदले विशेष अनुदान के गुहार लगा रही प्रदेश सरकार को इस बार केंद्रीय बजट से काफी उम्मीदें थीं। इस मांग के समर्थन में राज्य सरकार ने बाकायदा तार्किक आधार तैयार किया था। लेकिन यह मांग पूरी नहीं हो सकी। 

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पिछले दिनों आम बजट की तैयारी को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उत्तराखंड की प्राथमिकताओं पर चर्चा की थी।

उस दौरान शासकीय प्रवक्ता व वरिष्ठ  कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने राज्य की जो प्राथमिकताएं वित्त मंत्री के सामने रखी, उसमें ग्रीन बोनस की मांग भी शामिल थी। इस मांग को उठाने से पहले ग्रीन बोनस की मांग को लेकर राज्य सरकार के स्तर पर काफी होमवर्क किया गया था। नियोजन विभाग ने बाकायदा पर्यावरणीय सेवाओं की अकाउंटिंग के जरिये केंद्र से करीब सात हजार करोड़ रुपये सालाना अनुदान का आधार तैयार किया था। यह मांग ने कौशिक ने वित्त मंत्री के समक्ष रखी भी, लेकिन केंद्रीय बजट में शुद्ध हवा के लिए 2000 करोड़ की धनराशि और बढ़ाकर 6000 करोड़ तो किया गया, लेकिन ग्रीन बोनस का जिक्र तक नहीं हुआ।

राज्य के लोग ग्रीन बोनस की उम्मीद लगा रहे थे। केंद्र सरकार ने उन्हें निराश किया। केंद्र सरकार ने ग्रीन बोनस नहीं दिया।
- हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री

15वें वित्त आयोग ने वनों को महत्व देते हुए अपनी सिफारिश में 7.50 प्रतिशत का अधिमान दिया है। यह एक तरह से पर्यावरणीय सेवाओं के बदले दी जाने वाली विशेष सहायता ही है।
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- आलोक भट्ट, आर्थिक सलाहकार, मुख्यमंत्री

15वें वित्त आयोग ने राज्य को विशेष सहायता दी है। इसमें आपदा प्रबंधन के लिए भी धनराशि का प्रावधान है। इसके अलावा वनों के लिए अलग से विशेष सहायता का उल्लेख है। केंद्र ने पर्यावरणीय महत्व को तरजीह दी है।
- बंशीधर भगत, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

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ये उम्मीदें भी परवान नहीं चढ़ीं

- प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 150 की आबादी का मानक पूरा नहीं हुआ
- सीमांत क्षेत्र विकास के लिए भी अलग से अनुदान चाह रहा था उत्तराखंड
- मनरेगा योजना में श्रम सामग्री के अनुपात को 50: 50 कराने की मांग थी
- प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में गांवों में घर बनाने की धनराशि को 1.30 लाख से बढ़ाकर दो लाख किया जाए
- स्वरोजगार के लिए दिए जाने वाले ऋण को दो लाख से बढ़ाकर तीन लाख किया जाए
- गोरीकुंड-केदारनाथ, गोविंदघाट-हेमकुंड और नैनीताल रोपवे निर्माण केंद्रीय योजना में शामिल हो 
- छोटे उद्योगों की मदद के लिए रूरल बिजनेस इक्यूबेटर की स्थापना को वित्तीय मदद दे केंद्र
- ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत सहायता राशि को 35 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाए 
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