इस तरह हो सकेंगे विवाह रद्द व अमान्य
अधिनियम पारंपरिक विवाह समारोहों को यथावत मान्य करता है, फिर भी यह कुछ ऐसे कानूनी प्रावधान रखता है जिनके तहत विवाह अमान्य या रद्द करने योग्य घोषित किया जा सकता है। अधिनियम लागू होने के बाद हुए किसी विवाह में ऐसे तथ्य सामने आते हैं जो अधिनियम की मुख्य शर्तों का उल्लंघन करते हैं तो विवाह अमान्य माना जाएगा। इनमें विवाह के समय किसी पक्षकार का पहले से जीवित जीवनसाथी होना, मनोवैधानिक रूप से वैध सहमति देने में असमर्थता या निषिद्ध संबंधों के दायरे में विवाह शामिल हैं।
ऐसी स्थिति में दोनों पक्षकारों में से कोई भी अदालत में याचिका दायर करके विवाह को शून्य घोषित करने की मांग कर सकता है। यही नहीं यदि कोई विवाह अमान्य या रद्द करने योग्य घोषित भी कर दिया जाए, तब भी उससे जन्म लेने वाले बच्चे को वैध माना जाता है।