परियोजना में भारत की ओर से नोडल एजेंसी जीबी पंत हिमालय पर्यावरण विकास संस्थान के निदेशक डॉ.आरएस रावल ने बताया कि कैलाश मानसरोवर जाने वाले सभी प्राचीन मार्गों जागेश्वर-गंगोलीहाट-पातालभुवनेश्वर मार्ग, पूर्णागिरि से रामेश्वर-हाट कालिका होकर मानसरोवर जाने वाला मार्ग, पिथौरागढ़ से झूलाघाट नेपाल होकर जाने वाले मार्गों को विश्व धरोहर वाले प्रस्ताव में शामिल किया गया है।
डॉ. रावल ने यह भी बताया कि कैलाश क्षेत्र के बारे में विस्तृत जानकारियों वाला प्रस्ताव भारतीय वन्य जीव संस्थान ने तैयार करके पिछले साल मई में भारत सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय के माध्यम से नामांकन के लिए यूनेस्को भेज दिया था।
यूनेस्को ने बीते साल मई में इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए विश्व हेरिटेज की संभावित सूची में शामिल कर लिया था। डॉ. रावल के मुताबिक यूनेस्को परीक्षण आदि में एक साल का समय लगता है। इसलिए इस साल के भीतर कैलाश क्षेत्र को विश्व हेरिटेज घोषित करने के बारे में फैसला हो जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा यूनेस्को में नामांकन हो जाने के बाद इन धरोहरों के रखरखाव और संतुलित विकास का कार्य शुरू होगा।
विश्व धरोहर के प्रस्ताव में कैलाश मानसरोवर के प्राचीन मार्गों के अलावा इन मार्गों पर पड़ने वाले पवित्र तीर्थ स्थलों पाताल भुवनेश्वर, छिपलाकेदार, थल केदार, पंचेश्वर, छोटा कैलाश, कालापानी सहित कई अन्य स्थलों को भी वर्ल्ड हेरिटेज के प्रस्ताव में शामिल किया गया है।