निर्माणाधीन भवन, बंद मकानों की छत और ढाबों के पीछे खाली प्लॉटों में पड़ा पुराना सामान दून में डेंगू-मलेरिया के मच्छरों को संजीवनी दे रहा है। नगर निगम क्षेत्र में आशा वर्करों के माध्यम से किए जा रहे सर्वे में यह बात निकलकर सामने आई है। आशा वर्कर अभी तक शहर में 500 से ज्यादा जगहों पर डेंगू मच्छरों का लार्वा ढूंढ चुकी हैं।
डेंगू पर प्रहार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की आशा वर्कर निगम क्षेत्र में सर्वे कर रहीं हैं। सर्वे के दौरान वह इसकी भी जांच करती हैं कि मकान के बाहर या भीतर कोई ऐसी जगह या बर्तन जिसमें पानी भरा हो और डेंगू का लार्वा तो नहीं है। लार्वा मिलने पर आशा उसको नष्ट करती हैं। देहरादून में ऐसा कोई वार्ड या मोहल्ला नहीं है जहां इस समय भवन निर्माण नहीं चल रहा हो। आशा वर्करों और स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सबसे ज्यादा लार्वा निर्माणाधीन साइटों या फिर बंद मकानों में मिल रहा है।
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आशा वर्करों को अभी तक नहीं मिली है दवाइयांI
सर्वे करने के लिए आशा वर्कर घर-घर जा रही हैं। यदि किसी गमले-बर्तन या पात्र में पानी भरा मिलता है तो उसे आशा स्वयं नष्ट कर देती हैं। लेकिन निर्माणाधीन साइटों और अन्य जगहों जहां जलभराव में लार्वा मिलता है तो उसमें एंटी लार्वा दवाई डाली जाती है। अभी तक आशाओं को दवाई नहीं मिली हैं। जबकि निगम ने पांच-पांच लीटर की 600 कैन स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराई हैं।
Iनिर्माण साइटों पर पानी के लिए बनाए गए गड्ढे डेंगू मच्छरों का घरI
भवन निर्माण के दौरान पानी की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में निर्माण साइटों पर पानी स्टोर करने के लिए गड्ढा बनाया जाता है। यह पानी 15 से ज्यादा दिनों तक रह जाता है। इस साफ पानी में डेंगू का मच्छर पनपता है। नगर निगम क्षेत्रों में जहां-जहां लार्वा मिला है उनमें अधिकतर इन्हीं गड्ढों में मिला है।
आशा वर्कर क्षेत्र में सर्वे कर रहीं हैं। वह खाली प्लॉटों, गमलों, बंद मकानों की छतों सहित हर जगह पर ध्यान रखती हैं जहां पानी भर सकता हो। ज्यादातर लार्वा निर्माणाधीन भवन, बंद मकानों में रखे गमलों या फिर उनकी छत पर भरे पानी में मिल रहा है। - डाॅ. सीएस रावत, जिला सर्विलांस अधिकारी