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आध्यात्मिक प्रवास में महावतार गुफा पहुंचीं उमा भारती, कहा राम मंदिर को लेकर इस फैसले का इंतजार

Fri, 29 Jun 2018 08:56 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)
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महावतार गुफा पहुंचीं केंद्रीय मंत्री उमा भारती - फोटो : amar ujala
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केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि देवभूमि के विकास को लेकर केंद्र सरकार गंभीर है। प्रदेश में पानी की समस्या अधिक है, जिसे दूर करने के लिए स्वजल के माध्यम से कई योजनाएं संचालित की जा रही है। पेयजल को लेकर राज्य सरकार केंद्र को जो भी प्रस्ताव भेजेगी उसे प्राथमिकता दी जाएगी।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय के निर्णय का इंतजार है। इसके लिए सभी दलों को भी सहयोग करने की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री उमा भारती अपने आध्यात्मिक प्रवास के तहत द्वाराहाट के पांडवखोली स्थित महावतार बाबा की गुफा रवाना होने से पूर्व कुछ देर यहां वन विश्राम गृह में रुकीं। यहां पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा देवभूमि में देवों का वास है, यहां आकर उन्हें सुखद आध्यात्मिक अनुभूति होती है।

रानीखेत में कार्यकर्ताओं ने किया स्वागत 
रानीखेत। वन विश्राम गृह रानीखेत में भाजपा कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती का स्वागत किया। स्वागत करने वालों में जिला महामंत्री प्रेम शर्मा, नगर अध्यक्ष विनोद भार्गव, छावनी उपाध्यक्ष मोहन नेगी, रतन माहरा, प्रकाश जोशी, चंदन भगत, राजेंद्र जसवाल, हंसादत्त बवाड़ी आदि शामिल रहे।
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महावतार बाबा की गुफा में एक घंटे तक लगाया ध्यान 
आध्यात्मिक प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री उमा भारती बृहस्पतिवार रात नौ बजे दुधोली स्थित वन विश्राम गृह पहुंचीं। रात में ही उन्होंने दूनागिरि मंदिर जाकर वैष्णवी शक्तिपीठ के दर्शन किए। कुकुछिना स्थित आश्रम में भोजन करने के बाद देर रात वह दुधोली विश्राम गृह पहुंची। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री उमा भारती पांडवखोली स्थित महावतार बाबा की गुफा पहुंचीं। यहां उन्होंने एक घंटे तक ध्यान लगाया। योगदा आश्रम के ब्रह्मचारी निलिप्तानंद गिरि ने उन्हें क्रिया योग की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने मीडिया से दूरी बनाए रखी।

उमा ने शिव के दर्शन किए, गणेश ने कराई पूजा
केंद्रीय मंत्री उमा भारती देर शाम उत्तराखंड की काशी के नाम से विख्यात विमांडेश्वर मंदिर पहुंची। यहां उन्होंने भगवान शिव के दर्शन किए। इस दौरान पुजारी गणेश दत्त ने पूजा अर्चना कराई। देर शाम तक वह मंदिर में ही थी। 

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