लोक सुनवाई व जनसंवाद में छात्र-छात्राओं ने परीक्षा के दौरान सामने आने वालीं चुनौतियों पर खुलकर अपनी बात रखी। वहीं कुछ प्रतिभागियों ने क्षेत्रीय भाषाओं के आधार पर पूछे जाने वाले अधिक प्रश्नों पर आपत्ति जताई।
पेपर लीक मामले की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय जांच आयोग ने एचआरडीए सभागार में सुनवाई व जनसंवाद किया। इस दौरान क्षेत्रीय भाषा के आधार पर अधिक सवाल और जैमर की गुणवत्ता पर छात्र-छात्राओं व केंद्र व्यवस्थापकों ने सवाल उठाए।
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लोक सुनवाई व जनसंवाद में छात्र-छात्राओं ने परीक्षा के दौरान सामने आने वालीं चुनौतियों पर खुलकर अपनी बात रखी। वहीं कुछ प्रतिभागियों ने क्षेत्रीय भाषाओं के आधार पर पूछे जाने वाले अधिक प्रश्नों पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि करीब 12 से अधिक सवाल क्षेत्रीय स्तर के पूूछे जाते हैं इससे मैदानी इलाके हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के प्रतिभागियों को उलझन होती है। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं के अलावा कोचिंग सेंटर के संचालक और विभिन्न कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने प्रतिभाग किया। कुछ केंद्र व्यवस्थापकों ने परीक्षा के दौरान लगाए जाने वाले जैमर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जैमर की खराब क्वालिटी के चलते बच्चों को रेडिएशन से खतरा रहता है।
जनसंवाद के दौरान तथ्यों और सुझावों को सुनते हुए न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी ने कहा कि स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा 2025 के दौरान कथित पेपर लीक के आरोप की जांच की जा रही है। हल्द्वानी, काठगोदाम, रुद्रपुर में लोक सुनवाई और जनसंवाद कार्यक्रम किया जा चुका है। सभी सुझावों पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी ने कहा कि नकल के संबंध में किसी के पास कोई जानकारी या साक्ष्य है तो वह प्रस्तुत कर सकते हैं। इस संबंध में गठित एसआईटी जांच कर रही है। सरकार ने सीबीआई से भी जांच कराने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए परीक्षा को भी निरस्त किया है। जनसुनवाई के दौरान सचिव जांच आयोग बिक्रम सिंह राणा, अपर जिलाधिकारी वित्त व राजस्व दीपेंद्र सिंह नेगी, प्रशासनिक अधिकारी नवीन कुमार शर्मा, देवेंद्र जुयाल समेत अन्य मौजूद रहे।