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Uksssc Paper Leak Case: आयोग के छह कर्मचारियों और कंपनी के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश

Thu, 08 Sep 2022 07:00 AM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक मामले में अब तक 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। सबसे बड़ी गिरफ्तारी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन लिमिटेड के मालिक राजेश चौहान की मानी जा रही है। उसने केंद्रपाल नाम के दलाल को दो करोड़ रुपये में पेपर बेचा था।
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जांच पड़ताल(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : pixabay
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विस्तार
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पेपर लीक मामले में पुलिस की जांच की सुई अब उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की तरफ घूम रही है। पुलिस मुख्यालय ने आयोग के छह कर्मचारियों और आउटसोर्स कंपनी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। मुख्यालय के सिफारिशी पत्र पर शासन में मंथन शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, जल्द ही इसमें शासन की ओर से जांच के आदेश हो सकते हैं।

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बता दें कि स्नातक स्तरीय परीक्षा के पेपर लीक मामले में अब तक 35 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। सबसे बड़ी गिरफ्तारी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन लिमिटेड के मालिक राजेश चौहान की मानी जा रही है। उसने केंद्रपाल नाम के दलाल को दो करोड़ रुपये में पेपर बेचा था। एसटीएफ की अब तक की जांच में बड़े-बड़े नाम सामने आए, लेकिन आयोग की आपराधिक भूमिका का पता नहीं चल पा रहा था। इसमें अब तक आयोग के दो पूर्व कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों संविदा पर तैनात थे और उनकी कंपनी में अच्छी पैठ थी।  
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मगर अब यह लापरवाही षड्यंत्र का रूप लेती नजर आ रही है। इसकी परतें खोलने के लिए विजिलेंस को काम पर लगाने पर विचार हो रहा है। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने आयोग के छह कर्मचारियों और आरएमएस कंपनी के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। शासन के आधिकारिक सूत्रों ने इस सिफारिशी पत्र के मिलने की पुष्टि की है। अब देखने वाली बात है कि कितनी जल्दी इस मामले में आदेश होते हैं। बता दें कि अभी तक दरोगा भर्ती मामले में विजिलेंस को आदेश की कॉपी नहीं मिली है। जबकि, इस परीक्षा की जांच के लिए विजिलेेंस ने टीमें भी गठित कर ली हैं। 

षड्यंत्र पाया गया तो फसेंगे बड़े नाम  

यदि इस मामले में विजिलेंस जांच होती है तो बड़े-बड़े नाम भी फंस सकते हैं। बताया जा रहा है कि इसमें आयोग के कुछ जिम्मेदार लोगों की बड़ी लापरवाही रही है। अब यह लापरवाही है या षड्यंत्र, इस बात को जांच के बाद ही कहा जा सकता है। परीक्षा की सारी गोपनीय प्रक्रियाओं की वीडियोग्राफी होती है। इसमें वीडियोग्राफर भी आयोग के होते हैं। परीक्षा केंद्रों पर भी वीडियोग्राफी होती है, लेकिन गलती पर गलती होती गई और आयोग को पता ही नहीं चला, यह बात किसी के गले नहीं उतर रही।

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