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Uksssc Paper Leak: दागी RMS कंपनी को आयोग ने किया डिबार, अब वित्तीय अनियमितता भी आ रही सामने

Fri, 23 Sep 2022 09:48 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

स्नातक स्तरीय भर्ती और सचिवालय रक्षक भर्ती का पेपर लीक करने के बाद जैसे-जैसे एसटीएफ ने जांच की तो कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों, मालिक की भूमिका साफ होती चली गई।
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कंपनी केा किया डिबार - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने समूह-ग भर्तियों के पेपर लीक की दागी लखनऊ की कंपनी आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन को डिबार कर दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में यह कंपनी किसी भी परीक्षा या अन्य कार्य के लिए पात्र नहीं होगी। पेपर लीक प्रकरण में कंपनी के मालिक राजेश चौहान सहित पांच कर्मचारी सलाखों के पीछे जा चुके हैं।

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स्नातक स्तरीय भर्ती और सचिवालय रक्षक भर्ती का पेपर लीक करने के बाद जैसे-जैसे एसटीएफ ने जांच की तो कंपनी के अधिकारियों, कर्मचारियों, मालिक की भूमिका साफ होती चली गई। मामले में एसटीएफ अभी तक कंपनी के मालिक राजेश चौहान, उसके भाई संजीव कुमार के अलावा कर्मचारी जयजीत दास, अभिषेक वर्मा व विपिन बिहारी को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। 
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आयोग ने इन सभी प्रकरणों के आधार पर एक सितंबर को कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी का जवाब आने के बाद एसटीएफ से अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी। कंपनी के जवाब और रिपोर्ट के आधार पर शुक्रवार को अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने कंपनी को डिबार कर दिया।

आयोग के सचिव सुरेंद्र सिंह रावत की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, कंपनी के साथ 15 अक्तूबर 2015 को जो करार हुआ था, उसके बिंदु-7 में यह स्पष्ट था कि परीक्षा संबंधी कार्यों में विश्वसनीय कर्मचारियों को लगाने के साथ ही गोपनीयता के साथ काम करना होगा। कंपनी के इस कृत्य से जहां आयोग व सरकार की छवि धूमिल हुई है, वहीं लाखों युवाओं के भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

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वित्तीय अनियमितता भी कंपनी को काम देने में आई सामने 

आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशन कंपनी को परीक्षा आयोजन का काम देने में वित्तीय अनियमितता भी सामने आ रही है। कंपनी को ठेका 22 करोड़ रुपये में दिया गया था। विजिलेंस जांच में इस बात के साक्ष्य मिले हैं कि कुछ अधिकारियों ने अपने मन से कीमत तय कर कंपनी को लाभ पहुंचाया है। 

इस संबंध में विजिलेंस ने आयोग से कुछ दस्तावेज मांगे हैं। जल्द ही विजिलेंस मुकदमा दर्ज कर सकती है। यदि ऐसा हुआ तो पूर्व सचिव समेत अन्य अधिकारियों की मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी। स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में धांधली की जांच में तमाम खुलासे हुए। आयोग के अफसरों पर सीधे तौर पर पैसे लेने की बात सामने नहीं आई, लेकिन भूमिका को संदिग्ध माना गया, जिस पर पूर्व सचिव, पूर्व परीक्षा नियंत्रक समेत पांच अफसरों और कंपनी के खिलाफ शासन ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे।

विजिलेंस ने पिछले दिनों जांच शुरू की तो कई तथ्य सामने आए हैं। विजिलेंस सूत्रों के मुताबिक, कंपनी को काम देने के लिए वित्तीय अनियमितता भी हुई है। इसके लिए आयोग से दस्तावेज मांगे गए हैं, लेकिन अभी तक आयोग की ओर से दस्तावेज मुहैया नहीं कराए गए हैं। इसके लिए उन्होंने शासन से अनुमति लेने की बात कही है। इसके बाद ही जांच में और भी बात सामने आ सकती हैं। कंपनी को 22 करोड़ रुपये में परीक्षा कराने का ठेका दिया गया था। इसके लिए बहुत से नियमों को दरकिनार किया गया है। विजिलेंस के अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में जल्द ही मुकदमा भी दर्ज किया जा सकता है।
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