पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद खालिद नाम के अभ्यर्थी को गिरफ्तार कर लिया। पता यह भी चला कि उसने यह पेपर अपनी बहन साबिया को भेजा था जिसने हल कराने के लिए टिहरी गढ़वाल की प्रोफेसर सुमन को भेजा। सुमन ने कुछ प्रश्न हल किए और बाद में इस पेपर को बेरोजगार संघ के एक नेता को व्हाट्सएप के माध्यम से भेज दिया। पुलिस ने साबिया को गिरफ्तार किया लेकिन सुमन को गिरफ्तार नहीं किया था। युवा इस मामले में सीबीआई जांच की मांग के लिए आंदोलन करने लगे तो मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी।
इसके बाद सीबीआई ने 22 अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज कर सुमन को भी गिरफ्तार कर लिया। अब सीबीआई ने करीब दो महीने की जांच के बाद तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई की ओर से जारी प्रेसनोट में इसकी जानकारी दी गई है। चार्जशीट प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों के प्रयोग की रोकथाम अधिनियम-2023 और बीएनएस की धारा 61(2)(आपराधिक षड्यंत्र), 238 (अपराध के साक्ष्यों को मिटाना), 241 (इलेक्ट्रॉनिक व अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को छिपाना) और 318 (4)(धोखाधड़ी) की धाराओं में दाखिल की गई है।