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वजूद तक नहीं बचा सकी UKD, जानें अब तक के चुनावों में कैसे गिरा उक्रांद का ग्राफ

Sat, 11 Mar 2017 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : demo pic
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विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) अपना वजूद तक नहीं बचा सकी। कभी मजबूत क्षेत्रीय दल के रूप में पहचान बनाने वाली उक्रांद की मान्यता इस बार भी छिन गई। इससे पहले कम मतदान प्रतिशत के चलते पार्टी की मान्यता 2012 में भी खत्म की जा चुकी है।
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चुनाव दर चुनाव उक्रांद का प्रदर्शन गिरा है। पार्टी ने 2002 में पहले विधानसभा चुनाव में दमदार प्रदर्शन किया। तब 62 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और चार पर जीत दर्ज की। कुल 5.49 प्रतिशत, यानी 1,57,021 वोट पार्टी को मिले। 2007 में भी पार्टी का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। पार्टी को पिछले चुनाव की तरह 5.49 प्रतिशत वोट मिले।

इस चुनाव में पार्टी ने तीन सीटों पर पताका फहराया। इसके बाद से पार्टी का पतन शुरू हो गया। आपसी रात पार्टी पर भारी पड़ने लगी। अलग-अलग क्षत्रप आपस में टकराने लगे। जिसका असर 2012 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला। पार्टी ने 44 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए। जिनमें से केवल एक पर जीत मिली। 
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प‌िछले चुनाव में यह रहा आंकड़ा ​

- फोटो : demo pic
पार्टी का वोट प्रतिशत भी तेजी से नीचे गिरा। पार्टी को कुल 1.93 प्रतिशत वोट, यानी 82,176 मत मिले। आयोग ने पार्टी की मान्यता छीन ली। ऐसे में 2017 में पार्टी का वजूद खतरे में था।

जिससे उबरना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती थी। ऐसे में केंद्रीय अध्यक्ष पुष्पेश त्रिपाठी ने त्रिवेंद्र पंवार समेत सबको साधने की कोशिश की। उन्हें उम्मीद थी कि ऐसा होने से उक्रांद को मजबूती मिलेगी। पार्टी ने पंजीकृत पार्टी के रूप में चुनाव लड़ा। कुल 54 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए गए। लेकिन एक भी प्रत्याशी जीत हासिल नहीं कर सकी। पार्टी को कुल 0.07 प्रतिशत, यानी 37,039 वोट प्राप्त हुए। इस बार भी पार्टी की मान्यता छीन ली गई है। 


वर्ष       कुल वोट      मतदान प्रतिशत 
2002    1,57,021       5.49
2007    2,07,797       5.49
2012      82,176        1.93
2017      37,039        0.07
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