यूजेवीएनएल करीब तीन चार महीने से अतिक्रमण हटाने की तैयारी कर रहा था। अधिकारियों के बीच कई बैठकें भी हुई थीं। लोगों ने सितंबर में ही कब्जे तोड़ने शुरू कर दिए थे। निगम भी यह चाहता था कि अतिक्रमणकारी स्वयं कब्जा हटा लें, लेकिन कुछ ही लोग अपने भवन को पूरी तरह से तोड़े थे। निगम को लगा कि बिना अभियान चलाए अतिक्रमण नहीं हटेगा तो कब्जे को ध्वस्त करना शुरू किया।
शुक्रवार को संयुक्त टीम का पूर्वानुमान बिल्कुल सटीक साबित हुआ। इस बार अभियान में 100 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन, 19 मार्च जैसी तैयारी नजर नहीं आ रही थी। तब एक दिन पहले ही ढकरानी में डीजीएम कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में जेसीबी तैनात कर दी गई थी। इस बार सुबह जेसीबी आसन बैराज कैंटीन के पास पहुंची।
टीम नहर पटरी के दोनों ओर आगे बढ़ते हए अतिक्रमण को हटाने लगी। लोगों ने अतिक्रमण हटाने के लिए समय तो मांगा, लेकिन सीधे तौर पर कार्रवाई का कोई विरोध नहीं किया। इस बार नहर में एसडीआरएफ की तैनाती नहीं की गई है। नहर के जलस्तर को जरूर कम किया गया था। पिछली बार कार्रवाई के दौरान अतिक्रमणकारियों के नहर में कूदने की आशंका थी। यूजेवीएनएल ने इस बार नहर के जलस्तर को ही घटा दिया।