अब किसी भी कॉलेज को डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी का दर्जा आसानी से नहीं मिलेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने डीम्ड यूनिवर्सिटी से जुड़ा नया एक्ट लागू कर दिया है। इसमें कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं। इससे कि राह मुश्किल होगी।
यूजीसी के मुताबिक किसी भी कॉलेज को डीम्ड दर्जा हासिल करने के लिए राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से वैध होना जरूरी होगा। तीन चरणों में कम से कम 3.26 सीजीपीए होना चाहिए। आवेदन करने वाले संस्थान का नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की रैंकिंग में शीर्ष-100 संस्थानों या किसी विशिष्ट श्रेणी में शीर्ष-50 में शामिल होना आवश्यक है।
कम से कम दो गुणवत्तायुक्त जर्नल प्रकाशित होने भी जरूर हैं। आवेदन करने वाला संस्थान कम से कम 20 वर्ष पुराना होना चाहिए। यहां शिक्षक-छात्र अनुपात कम से कम 1:20 होना जरूरी है। विवि को डीम्ड का दर्जा मिलने के बाद हर वर्ष उसकी निगरानी की जाएगी। इसमें यह जरूरी है कि उस विवि के स्नातक पास करने वाले कम से कम 50 प्रतिशत छात्रों को हर साल रोजगार मिले।
यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कम से कम 50 प्रतिशत छात्र हर साल ग्रेजुएशन एप्टीट्यूड टेस्ट (गेट), ज्वाइंट एडमिशन टेस्ट फॉर एमएससी (जैम) या यूजीसी नेट जैसी परीक्षाओं में शामिल हो। ऐसे संस्थानों में जितने भी नए शिक्षक भर्ती होंगे, उन्हें सबसे पहले प्रशिक्षण देना अनिवार्य होगा।
हर साल एडमिशन होने के बाद दाखिलों की पूरी जानकारी डीम्ड यूनिवर्सिटीज को अपनी वेबसाइट पर जारी करनी होगी। उत्तराखंड में भी एफआरआई, ग्राफिक एरा और गुरुकुल कांगड़ी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला हुआ है।