यू हेल्थ योजना में निजी अस्पताल तभी शामिल होंगे जब उनके बकाए का भुगतान हो जाएगा। अस्पतालों के यह संकेत संकेत देने के बाद स्वास्थ्य विभाग पांच साल पुरानी फाइलों को ढूंढने में जुट गया है।
निजी अस्पतालों को 12 करोड़ रुपए का भुगतान बाकी है। इसमें अभी तक सिर्फ दो करोड़ रुपए दिए गए हैं। विभाग पांच हजार डिफाल्टर केस की फाइलें खंगालने में जुट गया है।
अप्रैल, 2011 से अब तक यू हेल्थ योजना के पांच हजार केस डिफाल्टर हुए हैं। इनमें से अधिकांश की प्रीमियम जमा नहीं हुई है। इस वजह से विभाग ने अस्पतालों का भुगतान नहीं किया। अस्पताल प्रबंधनों ने कई बार नोटिस देने के बाद योजना से पलड़ा झाड़ लिया।
भुगतान बकाया होने से अस्पताल इस योजना में शामिल होने से कतरा रहे हैं। अब योजना को नए सिरे से लॉंच करने के पहले, इन अस्पतालों के बकाए के भुगतान की तैयारी की जा रही है।
योजना का कोई केस डिफाल्टर न हो, इससे बचने के लिए वेतन और पेंशन से प्रीमियम के भुगतान का प्रावधान किया गया है। पहले लाभार्थी खुद कोषागार में जाकर प्रीमियम करता था।
इसके अलावा विभाग ने सोसाइटी के गठन के लिए खाका तैयार कर लिया है। सोसाइटी के लिए अलग से स्टाफ रहेगा। इनके वेतन का भुगतान कार्ड धारकों से मिली अंशदान की राशि से किए जाने का प्रस्ताव है।