II- शहर के अधिकांश पेट्रोल पंप हुए ड्राई, बढ़ी पेट्रोल-डीजल की किल्लत
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I- देहरादून पेट्रोल पंप वेलफेयर एसोसिएशन का दावा- 80 प्रतिशत पंप खाली
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शहर के पेट्रोल पंपों पर शाम होते-होते दो से तीन किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। देहरादून पेट्रोल पंप वेलफेयर एसोसिएशन का दावा है कि जिले 80 प्रतिशत पंप खाली हो गए हैं। मालूम हो कि एक जनवरी से ट्रक-बस चालकों की हड़ताल चल रही है जिसके चलते पेट्रोल-डीजल, सीएनजी का संकट खड़ा हो गया है।
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Iपेट्रोल पंपों में गत 31 दिसंबर को पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति की गई थी। बता दें कि एक बार में अमूमन दो दिन का स्टॉक आता है। कई पेट्रोल पंपों पर सोमवार रात को ही ईंधन खत्म हो गया। ऐसे में मंगलवार की सुबह ही उन पेट्रोल पंप पर स्टॉक खत्म होने का बोर्ड टंगे मिले। जिन पेट्रोल पंपों में स्टॉक था, उन पर रात होते-होते लंबी लाइन लग गई। कई पेट्रोल पंपों पर पुलिस को व्यवस्था संभालनी पड़ी जिससे उनकी कड़ी मशक्कत हो गई।
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Iलगभग 80 प्रतिशत पेट्रोल पंपों का स्टॉक खत्म हो चुका है। अगर हड़ताल जारी रहती है तो दून में पेट्रोल-डीजल का संकट खड़ा हो जाएगा। - सचिन गुप्ता, सचिव, देहरादून पेट्रोल पंप वेल्फेयर एसोसिएशन
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Iपेट्रोल-डीजल का फिलहाल कोई संकट नहीं है। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल के कारण सेवाएं बाधित हुई हैं। 31 दिसंबर को पेट्रोल पंपों में पर्याप्त स्टॉक पहुंचा दिया गया था। कुछ डीलरों ने कम पेट्रोल-डीजल लिया। लिहाजा उनके यहां स्टॉक खत्म हो गया हो गया। - प्रभात वर्मा, उत्तराखंड प्रभारी, आईओसीI
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Iडीएसओ ने पेट्रोल पंपों का निरीक्षण किया
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Iट्रक ड्राइवरों की हड़ताल के चलते बढ़े पेट्रोल-डीजल के संकट को देखते हुए डीएसओ केके अग्रवाल ने टीम के साथ विभिन्न पेट्रोल पंपों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि कुछ पेट्रोल पंपों में अभी स्टॉक है लेकिन सीएनजी का संकट बढ़ गया है। ट्रांसपोर्टनगर से सीएनजी के एक ट्रक को पुलिस की मौजूदगी में पंपों तक पहुंचाया गया। कहा कि अगर हड़ताल जारी रहती है तो इसी प्रकार से पुलिस का सहयोग लेकर पंपों तक पेट्रोल, डीजल और सीएनजी को पहुंचाया जाएगा।
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Iफल, सब्जी, दूध की सप्लाई बाधित
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Iट्रक ड्राइवरों की हड़ताल से फल, सब्जी, दूध की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। वाहन न चलने के कारण कई क्षेत्रों में दूध के वाहन नहीं पहुंचे। जिसके, कारण लोगों को दूध नहीं मिल पाया। फल-सब्जी के सप्लाई भी प्रभावित हुई है। मंडी सचिव विजय थपलियाल ने बताया कि मंडी के कारोबार में 20 प्रतिशत फर्क पड़ा है। अगर हड़ताल जारी रहती है तो किल्लत हो सकती है।I