स्वाइन फ्लू की दस्तक के साथ आला अधिकारियों के निर्देश पर दून और कोरोनेशन अस्पतालोें में आईसोलेशन वार्ड खोल दिए गए हैें। वार्डों में स्वाइन फ़्लू की दवा ‘टेमी फ्लू’ के अलावा पर्याप्त मात्रा में मास्क, आक्सीजन सिलिंडर, टेस्टिंग किट रखवा दी गईं हैं। अस्पतालों में दवाइयों की कमी नहीं हो इसके लिए अतिरिक्त दवाइयां, मास्क और टेस्टिंग किट मंगाए गए हैं। सीएमओ डॉ. एसके गुप्ता का कहना है कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर भी दवाइयां और मास्क खरीदे जाएंगे।
राज्य मेें नहीं स्वाइन फ्लू जांच की व्यवस्था
चौंकाने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से सेवाओं को बेहतर करने के लिए बेशक हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हाें, लेकिन स्वाइन फ्लू की जांच को लेकर कोई व्यवस्था राज्य में नहीं है। एसीएमओ डॉ. दयाल शरण ने बताया कि जिन मरीज में स्वाइन फ्लू की आशंका होेती है, उसके खून के नमूने लेकर जांच के दिल्ली भेजे जाते हैं। जहां से चार से पांच दिन में रिपोर्ट आती है। यदि राज्य में ही जांच की व्यवस्था हो जाए तो जांच रिपोर्ट जल्दी आ रकेगी और उपचार भी जल्दी शुरू हो सकेगा।
अस्पतालों में स्टाफ की सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं
एक तरफ जहां स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी ने दस्तक दे दी है, वहीं दून और कोरोनेशन जैसे सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। अस्पताल में किसी भी डॉक्टर, पैरा मेडिकल और स्टाफ के पास न तो मास्क और न ही कोई अन्य उपकरण।