उत्तराखंड में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार दो आवासीय संस्कृत विद्यालय खोलेगी। इनमें से एक विद्यालय गढ़वाल और एक कुमाऊं मंडल में खोला जाएगा।
कक्षा एक से 12 तक के इन विद्यालयों में डे-बोर्डिंग और आवासीय दोनों तरह के छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। संस्कृत शिक्षा विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है।
संस्कृत को राज्य में द्वितीय राज्यभाषा का दर्जा प्राप्त है। उसके बावजूद संस्कृत शिक्षा की बेहतरी के लिए बहुत ज्यादा प्रयास नहीं हुए हैं। प्रदेश में संस्कृत शिक्षा के केवल छह राजकीय विद्यालय हैं।
जबकि बड़ी संख्या में निजी, अर्द्धसरकारी या अशासकीय स्कूल चल रहे हैं। इसको देखते हुए संस्कृत शिक्षा विभाग ने आवासीय विद्यालयों के निर्माण की रूपरेखा तैयार की है।
सचिव संस्कृत शिक्षा उषा शुक्ला की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। जिसके बाद प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा दिया है।
निदेशक संस्कृत शिक्षा आरके कुंवर ने बताया कि दोनों मंडलों में एक-एक आवासीय विद्यालय खोलने की योजना है। 12वीं तक के इन स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक डे-बोर्डिंग होगा। जबकि कक्षा छह से 12वीं तक आवासीय व्यवस्था चलेगी।