नियम-कानून को ताक पर रखकर सरकार ने दो अफसरों को सेवा विस्तार दे दिया। यह चर्चित मामला समाज कल्याण विभाग के निदेशक और देहरादून के एसपी सिटी से जुड़ा है। हैरानी की बात तो यह है कि अनुमति तब दी गई जब मुख्य सचिव ने इससे संबंधित फाइल पर सेवा विस्तार को नियमानुसार न होने की बात दर्ज की हुई है। इस बात की चर्चा जोरों पर है कि सत्ता के करीब होने के चलते इन अफसरों पर नियामतें बरसाई जा रही हैं।
उत्तराखंड सरकार में बतौर पीसीएस अधिकारी कार्यरत विष्णु सिंह धनिक समाज कल्याण विभाग में निदेशक के पद पर तैनात हैं। इसी 31 जुलाई को उन्हें सेवानिवृत्ति दी गई है। मगर सेवानिवृत्ति के ठीक एक दिन पहले ही उन्हें इसी पद पर छह माह का सेवा विस्तार दे दिया गया।
कुछ इसी तरह देहरादून में एसपी सिटी के पद पर तैनात रहे टीडी बेला बीते वर्ष 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें भी नियमों का मखौल उड़ाकर सेवा विस्तार दे दिया गया। बीती 31 जुलाई को उन्हें फिर से छह माह का सेवा विस्तार दे दिया गया। उन्हें जल्द ही हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में तैनात करने की तैयारी है।
मुख्य सचिव ने बताया नियमविरुद्ध फिर भी फाइल पास
हैरानी की बात यह है कि इन दोनों ही फाइलों में मुख्य सचिव ने सेवा विस्तार को नियमानुसार न बताते हुए अपनी आपत्ति दर्ज की हुई है। बावजूद इसके सेवा विस्तार की कार्रवाई अमल में ले आई गई। शासन के सूत्रों की मानें तो ये दोनों ही अधिकारी सत्ता के काफी करीबी हैं, जिसके चलते इन्हें दोबारा तैनाती दी गई है। इस मामले में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया।
यह है व्यवस्था
सेवा विस्तार का मतलब है कि संबंधित अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद भी पहले की तरह ही काम करता रहेगा। उसे मिलने वाले वेतन और सुविधाओं में कोई कमी नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि सरकार को केवल मुख्य सचिव को दो बार में तीन-तीन माह (कुल छह माह) का सेवा विस्तार देने का अधिकार है। पूर्व में अन्य अफसरों के दो वर्ष तक सेवा विस्तार की व्यवस्था वित्तीय हस्तपुस्तिका (फाइनेंशियल हैंडबुक) के नियम-56 में थी। मगर वर्ष 2004-05 में वित्त विभाग ने इसमें संशोधन करते हुए नियम-56 में संशोधन करते हुए इसे समाप्त कर दिया गया।
पूर्व में सेवा विस्तार की अनुमति थी, वर्तमान में क्या स्थिति है इसे नियम देखकर ही बताया जा सकता है।
-राधा रतूड़ी, प्रमुख सचिव (कार्मिक)