गोविंद से कंपनी के मालिक ने बिना इंश्योरेंस की गाड़ी चलवाई। दुर्भाग्य से हादसा हो गया और अब कंपनी मालिक उसकी मदद नहीं कर रहा है। हादसे के शिकार व्यक्ति के परिजनों को भारतीय करेंसी में 64 लाख रुपये दिया जाना है। रताऊ गांव के लोगों ने अब तक 30 लाख रुपये चंदा एकत्रित कर लिया है। परिजनों ने उसे छुड़ाने के लिए राजस्थान सरकार और विदेश मंत्रालय से गुहार लगाई। पर सुनवाई नहीं हुई है।
इसी तरह गोविंदगढ़ जिला अजमेर का खलील अहमद पुत्र कमरुद्दीन रंगरेज भी सऊदी अरब के दमाम शहर में मुफलिसी का जीवन जी रहा है। यहां कंपनी के मालिक ने गाड़ी के वर्कशॉप में काम कराया और चार माह तक वेतन नहीं दिया। रुपये मांगने पर कंपनी मालिक ने चोरी का आरोप लगाकर उसे जेल भिजवा दिया, जहां से तीन घंटे बाद छोड़ दिया गया।
परिजनों ने बताया कि खलील ने भारत लौटने के लिए दूतावास के चक्कर लगाए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। आरोप है कि हेल्पलाइन नंबर पर भी कोई सुनने वाला नहीं है। इस बारे में बात करने पर समाज सेवी रोशन रतूड़ी ने बताया कि विदेश जाने के लिए 18 प्रकार के वीजा बनाए जाते हैं।
टूरिस्ट वीजा पर यहां आकर भारतीय लोग फंस जाते हैं। परिजनों से कागजात मांगे हैं, जल्द ही इनको स्वदेश लौटाया जाएगा। उन्होंने भारत सरकार से टूरिस्ट वीजा पर आने के बाद विदेशों में फंसने वाले लोगों के लिए कानून में सरलीकरण करने और दमाम की जेल में बंद राजस्थानी युवक को सकुशल घर लौटाने में मदद की मांग की है।