सरजीत से मिले एचई 36 हैंडग्रेनेड मिलने की सूचना पर एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने बम निरोधक दस्ते को मौके पर भेजा। उपनिरीक्षक विजय शंकर यादव के नेतृत्व में पहुंचे दस्ते में शामिल डॉग स्क्वाएड की टीम से ग्राम मेहतावन में कोसी नदी के आसपास सघन चेकिंग कराई गई। टीम ने बरामद हुए हैंड ग्रेनेड का परीक्षण किया। दोनों ग्रेनेड में बेस प्लग, लीवर, सेफ्टी वॉल्व लगा पाया गया। परीक्षण में दोनों हैंडग्रेनेड सक्रिय मिले। माल मुकदमाती होने के कारण अदालत से आदेश प्राप्त करने के बाद बरामद हैंडग्रेनेड डिफ्यूज किए जाएंगे।
हैंडग्रेनेड बरामदगी को लेकर अलग-अलग दावे
बिलासपुर निवासी सरजीत सिंह से हैंड ग्रेनेड मिलने को लेकर पुलिस और आरोपी के परिजनों के दावे अलग-अलग हैं। पुलिस के अनुसार सरजीत दोनों हैंड ग्रेनेड रामपुर के किसी व्यक्ति से लाया था। हालांकि उस व्यक्ति के बारे में पुलिस कोई जानकारी नहीं जुटा पाई। वहीं, आरोपी के चाचा महेंद्र सिंह का कहना है कि बुधवार दोपहर वह अपने भतीजे के साथ कोसी नदी से सटे खेत पर गया था। वहां पानी में कुछ नुकीली चीज चुभी।
देखा तो वहां लोहे के दो भारी टुकड़े पड़े थे, जिन्हें कबाड़ समझकर वह अपने साथ ले आए। दोनों टुकड़ों पर भारी मात्रा में जंक लगा हुआ था। उन्हें इन टुकड़ों के हैंडग्रेनेड होने की जानकारी नहीं थी। महेंद्र ने बताया कि दो दिन पूर्व ही सरजीत की पत्नी संदीप कौर का पित्त की पथरी का ऑपरेशन हुआ है, जिसके चलते वह अभी अस्पताल में है।
काशीपुर और आसपास के क्षेत्रों में इस्पात उद्योग अधिक होने के कारण यहां पहले भी मोर्टार मिलते रहे है लेकिन हैंडग्रेनेड के मामले में काशीपुर में यह पहली गिरफ्तारी है। 21 दिसंबर 2004 को एसजी स्टील फैक्ट्री में हुए धमाके में एक श्रमिक की मौत हो गई थी, जबकि कई श्रमिक घायल हो गए थे। इसके बाद मौके से बरामद 555 छोटे बड़े मोर्टार पतरामपुर चौकी के लिए आवंटित स्थल पर दबा दिए गए।
पुलिस चौकी स्थापित होने के बाद भी यह मोर्टार यहीं दबे रहे। अक्तूबर 2018 में सेना की मध्य कमान की ओर से चलाए गए ऑपरेशन में पतरामपुर पुलिस चौकी परिसर में जमींदोज 555 छोटे बड़े मोर्टार शेल (मिसाइलों) को फीका नदी में नष्ट किया गया था। वर्ष 2014 में कुंडेश्वरी के गढ़वाल ब्लॉक में श्मशान घाट के पास पथरी नदी में भी छह वर्ष पूर्व दर्जनों छोटे मोर्टार मिले थे। हालांकि यह सभी डिफ्यूज थे। इन मोर्टार के स्टील स्क्रैप में आने की संभावना जताई जा रही थी।
हालांकि पुलिस यह पता नहीं लगा सकी थी कि पथरी नदी में डिफ्यूज मोर्टार शेल किसने फेंके थे। तब पुलिस ने नदी से मृत मोर्टार कब्जे में लेकर उनका डिस्पोजल कर दिया था। इससे पूर्व वर्ष 2015 में कुंडा थाना क्षेत्र में भी एक कबाड़ी की दुकान से एक ग्रेनेड बरामद हुआ था। पुलिस ने बाद में इसे डिफ्यूज कर दिया था।