डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि आरोपी खुद को वन विभाग में प्रमुख वन संरक्षक और सहायक वन संरक्षक बताते थे। आरोपियों ने अपनी गाड़ियों के लिये भी नेम प्लेट भी बना रखी थी। नेम प्लेट पर वन विभाग का लोगो और एसीए मुख्यालय देहरादून लिखा है। आरोपी नेम प्लेट का प्रयोग गढ़वाल के पहाड़ी जिलों में भर्ती के नाम पर ठगी करने के लिए करते थे । आरोपियों ने दर्जनाें बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर ठगी कर 25 लाख रुपये से अधिक वसूलने की बात स्वीकार की है।
बेरोजगारों को फंसाने को बनाया ग्रुप
देहरादून। आरोपियों ने बेरोजगारों को जाल में फं साने को व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था। सुमितानंद और विक्की राणा ने ही ग्रुप में अपने कई-कई नंबर जोड़ रखे थे। इन्हीं नंबरों के माध्यम से वह ग्रुप में विश्वास जमाने को झूठे संदेश जारी करते थे। बाद में बेरोजगारों को इस ग्रुप से जोड़ लेते थे। ग्रुप में बातें सुनकर बेरोजगार उन पर विश्वास कर लेते थे।
कई बेरोजगारों को दिया वेतन
देहरादून। एसटीएफ के सीओ अंकुश शर्मा ने बताया कि इन लोगों ने काफी बेरोजगारों को वन विभाग में ट्रेनिंग भी दिलाई थी। जिन बेरोजगारों ने नौकरी ना मिलने पर दबाव बनाया तो इन ठगों ने उन्हें अपने स्तर से ही कई माह तक 15 से 18 हजार रुपये का वेतन भी दिया। साथ ही आश्वासन दिया था कि जल्द ही वन विभाग में उनकी ज्वाइनिंग हो जाएगी।
पुलिस टीम को पुरस्कार
डीआईजी रिद्धिम अग्रवाल ने टीम में शामिल सीओ अंकुश शर्मा, इंस्पेक्टर पंकज पोखरियाल, उप निरीक्षक राजेश ध्यानी, मुख्य आरक्षी सुरेश कुमार, आरक्षी श्रवण कुमार, मोहम्मद उस्मान, आकाश कौशिक, सुरेन्द्र कुमार और कुलदीप रौतेला को पुरस्कृत करने की घोषणा की है।