परिवार के अनुसार, दोनों युवकों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति भी नहीं थी। काम करने से इनकार करने पर उन्हें धमकाया जाता था। लंबे समय तक नियमित संपर्क नहीं होने से परिजनों की चिंता बढ़ती गई। अंतिम संपर्क के दौरान युवकों ने जिस परिसर में उन्हें रखा गया था, उसके आसपास ड्रोन अथवा मिसाइल हमले की जानकारी भी परिवार को दी थी। इसके बाद उनकी सुरक्षा को लेकर परिजनों की चिंता और गहरा गई।
मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को दोनों युवकों की सुरक्षित और शीघ्र वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार के अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क एवं समन्वय स्थापित कर दोनों भाइयों की वापसी के प्रयास तेज किए। प्रयासों के बाद दोनों भाइयों की सुरक्षित भारत वापसी सुनिश्चित हुई। करीब 97 दिनों के लंबे इंतजार के बाद दोनों सकुशल अपने घर पहुंचे।