भगवान तुंगनाथ के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे। आज मंगलवार को वैसाखी के पावन पर्व पर भगवान तुंगनाथ के पुजारी विजय भारत मैठाणी व मंदिर समिति ग्रामीणों की उपस्थिति में कपाट खुलने की तिथि घोषित की गई।
20 अप्रैल को भगवान की चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दी स्थल मक्कू से प्रस्थान करेगी और पुंडखि नामक स्थान पर भौग लगाकर रात्रि विश्राम भूतनाथ मंदिर में रहेगा। 21 अप्रैल को चल विग्रह डोली भूतनाथ मंदिर से लगभग 11 बजे प्रस्थान कर पाब गांव होकर चलियखोड़, बनियाकुण्ड रात्रि विश्राम के लिए अपने दूसरे पड़ाव चोपता पहुंचेगी।
22 अप्रैल को चोपता से सुबह 08 बजे प्रस्थान कर अपने ग्रीष्मकालीन गद्दी स्थल तुंगनाथ धाम के लिए प्रस्थान करेगी और 11बजे तुंगनाथ धाम भगवान तुंगनाथ जि की चल विग्रह डोली पहुँच कर पूजा अर्चना करने के बाद 11 बजे आम श्रद्धलुओं को दर्शन के लिए खोले जाएंगे।
21 मई को खुलेंगे मध्यमहेश्वर के कपाट,
बैसाखी के पर्व पर पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर के कपाट खोलने की तिथि निश्चित घोषित की गई। इस यात्राकाल के लिए द्वितीय केदार भगवान मध्यमहेश्वर धाम के कपाट 21 मई को श्रृद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। वहीं मां यमुना के शीतकालीन प्रवास खरसाली गांव में स्थित गीठ पट्टी के 12 गांवों के आराध्य देव सोमेश्वर महाराज के कपाट विधि-विधान और विशेष पूजा अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के लिए दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं।
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गौरीकुंड में मां गौरी माई मंदिर के कपाट खुले
केदारनाथ यात्रा के अहम पड़ाव गौरीकुंड में मां गौरी माई मंदिर के कपाट प्रात: आठ बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। इस दौरान भक्तों ने मां गौरी का आशीष लिया। वैशाखी के पावन पर्व प्रात गौरी गांव में पुजारी ने पूजा अर्चना के पश्चात माता की भोग मूर्तियों को कंडी में रख कर गांव से गौरीकुंड स्थित गौरीमाई मंदिर लाया गया। आठ बजे मंदिर में पहुंच कुल पुरोहित , मंदिर समिति एवं हक हकूक धारियों की मौजूदगी में मंदिर के कपाट छह माह भक्तों के दर्शनार्थ खोल दिए गए। मंदिर मठापति संपूर्णानंद गोस्वामी ने बताया कि प्रात पूजा अर्चना के बाद माता की भोग मूर्तियों को गौरी गांव मंदिर से गौरीकुंड गौरीमाई मंदिर लाया गया।