तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली के पहुंचने के बाद मंदिर के कपाट शुक्रवार को विधि-विधान के साथ खोल दिए गए।
शुक्रवार को सुबह 11 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए धाम के कपाट खोल दिए गए। इससे पहले बृहस्पतिवार को भूतनाथ मंदिर मक्कूमठ में हक-हकूकधारी पुजारी विजय भारत मैठाणी, शशि भूषण मैठाणी व विनोद मैठाणी ने भगवान की पूजा-अर्चना मठापति राम प्रसाद मैठाणी के हाथों संपादित करवाई।
इसके बाद सैकड़ों भक्तों के साथ भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली दोपहर साढ़े 12 बजे पावजगपुड़ा गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा और अक्षत से आराध्य देव का स्वागत किया। यहां से डोली चल्याखोड़, बनियाकुंड होते हुए शाम पाच बजे रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंची।
शुक्रवार को भगवान की डोली ने अंतिम पड़ाव से प्रात: सात बजे अपने धाम के लिए प्रस्थान किया। प्रात: 10.30 बजे भगवान अपने धाम पहुंचे। जहां विधि-विधान के साथ शुभ लग्न पर ग्रीष्मकाल के लिए तुंगनाथ मंदिर के कपाट खोले दिए गए।