उत्तराखंड के पहाड़ों में बारिश नहीं होने का असर मैदानी क्षेत्रों में पानी के संकट के रूप में दिख रहा है। कभी पानी से लबालब रहने वाला तुमड़िया जलाशय 46 साल में पहली दफा सूखा है।
जलाशय में पानी नहीं है तो उससे जुड़ी नहरें भी सूखी पड़ी हैं। जिसके चलते यूपी और उत्तराखंड की हजारों एकड़ भूमि में सिंचाई का संकट और गहरा गया है। पानी के अभाव में जलाशय में बड़ी तादाद में मछलियां, जलीय जीव और वनस्पतियां नष्ट हो गई हैं और सूखे के चलते जमीन में दरारें पड़ गई हैं। सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलने से किसान भी परेशान हैं।
तुमड़िया डैम का निर्माण 1970 में किया गया था। इसका मकसद सिंचाई के लिए यूपी और उत्तराखंड के किसानों को पानी मुहैया कराना था। यह जलाशय 20 किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। जलाशय से निकलने वाली तुमड़िया मुख्य नहर, तुमड़िया एक्सटेंशन, बहल्ला, तुमड़िया डैम फीडर से यूपी में 53 हजार 651 हेक्टेयर और उत्तराखंड में 22 हजार 921 हेक्टेयर जमीन में सिंचाई होती है।
बदलते मौसम के कारण जहां तापमान लगातार बढ़ रहा है, वहीं बारिश भी नहीं हो रही है। पहाड़ों और तराई में बारिश के अभाव में पहली बार तुमड़िया जलाशय सूखा है। जिसकी सीधी मार जलाशय के पानी से सिंचाई को निर्भर यूपी और उत्तराखंड के किसानों पर पड़ी हैं।
वर्तमान में बेमौसमी धान, गन्ना, सब्जियों, चारे के लिए पानी की जरूरत होती है। लेकिन, अब जलाशय सूखने से किसानों के समक्ष सिंचाई के लिए संकट गहरा गया है। किसानों की समक्ष में नहीं आ रहा कि वे अपने खेतों की सिंचाई किससे करें। फिलहाल पानी के अभाव में हजारों एकड़ में लगी फसलों के सूखने का खतरा बढ़ गया है।