सीएम ने इसके बाद आत्महत्या की धमकी देने वालों पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि मैं नौजवानों से पूछना चाहता हूं कि क्या ऐसे लोगों को सरकार को मदद देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह कायराना हरकत है। मेरी सरकार कायरों की बिल्कुल भी मदद नहीं करेगी। एक कहता है कि मुझे फॉरेस्ट में सड़क बनाने दो, मुख्य सचिव को पत्र भेजा है।
सीएम ने कहा कि दुख की बात है कि आत्महत्या की धमकी के इस नए फैशन का कुछ लोग खुलेआम समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मैंने कहा कि मैं मुख्यमंत्री हूं, मैं अपने पर्सनल अकाउंट से पैसा दे सकता हूं। आप भी दीजिए, नो प्रॉब्लम, लेकिन सरकार का एक पैसा ऐसे लोगों को नहीं दूंगा।
सीएम ने कहा कि विरोधी कहते हैं कि कुछ नहीं हो रहा है, हम कहते हैं कि अगर कुछ नहीं हो रहा है तो भ्रष्टाचार भी नहीं हो रहा है। इस दौरान विधायक खजान दास, विधायक सुरेश राठौर, डीएवी ट्रस्ट के प्रबंधक एके नारंग, प्राचार्य डॉ.ओपी कुलश्रेष्ठ, पर्यावरणविद् पद्मश्री डॉ.अनिल जोशी समेत कई लोग मौजूद रहे।
भ्रष्टाचार पर कत्लेआम की जरूरत
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि भ्रष्टाचार के कत्लेआम की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर हमने भ्रष्टाचार समाप्त कर लिया तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस राज्य की तस्वीर ही बदल जाएगी। कुछ लोगों की जेब में 600 से 700 करोड़ रुपया चला गया। 14 को जेल भेज चुका हूं।
आधी जांच हुई है, आधी जांच बाकी है। 26 लाख देना चाहिए था, 20 करोड़ चला गया। कहते हैं कि गलती हो जाती है। एक साढ़े आठ हजार का संविदा का बाबू। उसे लगा कि कोई देखने वाला नहीं है। एक दिन में उसके खाते में एक करोड़ चला गया। कहा कि नौजवान अगर ठान लें तो भ्रष्टाचार जरूर मिट जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्हें टैक्स चोरी की शिकायत से संबंधित एक मैसेज मिला, संबंधित अधिकारियों को तुरंत इसकी जांच के आदेश दे दिए गए। जांच में लगभग 60 लाख की टैक्स चोरी पकड़ी गई।
सीएम कार्यालय को मिला धमकी भरा पत्र, जांच बैठाई
मुख्यमंत्री के आत्महत्या को कायराना कहने के बयान के बीच मंगलवार को सीएम कार्यालय को आत्महत्या की धमकी का पत्र मिला। यह पत्र हल्द्वानी निवासी किसी सतीश चंद्र पांडेय के नाम से आया है। इसमें कहा गया है कि हल्द्वानी-कालाढूंगी मोटरमार्ग पर नरसिंह तल्ला नामक स्थान से रामपुर मार्ग को जोड़ने वाला मार्ग 1990 से राजस्व विभाग के अभिलेखों में अंकित है।
इस मार्ग का प्रथम भाग कच्चा है। हजारों वाहनों के गुजरने से यहां आसपास भारी प्रदूषण रहता है। कई बार पत्र लिखा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पत्र में धमकी दी गई है कि एक माह के भीतर अगर कार्रवाई नहीं होती है तो वह आत्मदाह को विवश होंगे। पत्र मिलते ही सीएम कार्यालय ने मामले की जांच बैठा दी है। सीएम ने नैनीताल के एसएसपी को जांच के आदेश दिए हैं।