तंगहाली का सामना कर रही उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार नई सड़कों पर फिलहाल काम नहीं छेड़ेगी।
लोक निर्माण विभाग में पूर्व सरकार के समय की 4930 करोड़ रुपये लागत की 2056 सड़कों की डीपीआर तैयार पड़ी है, लेकिन इन प्रस्तावों को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसकी बड़ी वजह बजट की कमी मानी जा रही है। राज्य सेक्टर में ही अकेले 4224.18 करोड़ रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत पड़े हैं, जबकि इस वित्तीय वर्ष में सरकार ने इस मद में केवल 300 करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया है।
जाहिर है कि सरकार के पास पैसे की कमी है और वह सड़कों के निर्माण के लिए अब एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के भरोसे है। सूत्रों के मुताबिक, शासन ने एडीबी से करीब 2500 करोड़ रुपये का ऋण लेने के लिए कोशिशें तेज कर दी हैं।
पिछले दिनों लोक निर्माण विभाग की एक समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विभाग को निर्देश दिए कि वह नई सड़कों पर काम शुरू करने के बजाय पहले उन कार्यों को पूरा करे जिनके लिए बजट की व्यवस्था हो चुकी है और जो कार्य पूर्ण होने वाले हैं। सूत्रों की मानें तो लोक निर्माण विभाग में करीब 2961 प्रस्तावों पर 75 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। लेकिन इन सड़कों को पूरा करने के लिए भी उसे ठीकठाक बजट की दरकार है।
सरकार पर नए प्रस्तावों का दबाव
प्रदेश सरकार पर सड़कों को लेकर पार्टी विधायकों के प्रस्तावों का लगातार दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार अब पुरानी स्वीकृतियों की समीक्षा करके उनके स्थान पर नए प्रस्तावों को शामिल करने पर भी विचार कर रही है।
4362 करोड़ की डिमांड, 2100 करोड़ का प्रावधान
लोक निर्माण विभाग में राज्य सेक्टर, वाह्य साहयतित योजना, नाबार्ड, केंद्रीय सड़क निधि व अन्य मदों में करीब 6754.85 करोड़ रुपये की स्वीकृतियां पड़ी है। इनके सापेक्ष फील्ड अधिकारियों ने इस वित्तीय वर्ष के लिए 4362.83 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी। इसके एवज में विभाग ने 2104.77 करोड़ रुपये का ही बजटीय प्रावधान किया। शासन 1416.56 करोड़ रुपये अवमुक्त कर चुका है। जून माह तक विभाग ने 428.65 करोड़ रुपये व्यय किए हैं।
मुख्यमंत्री जी ने अभी पूरी समीक्षा नहीं की है। वह एक बार फिर समीक्षा बैठक करेंगे। नई सड़कों के प्रस्तावों पर अभी निर्णय होना है। सरकार सड़कों के स्वीकृत प्रस्तावों के लिए एडीबी से धन जुटाने का प्रयास कर रही है। सरकार करीब 2500 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त होने की उम्मीद कर रही है।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव, लोनिवि