तीन तलाक के विरोध में याचिका दायर करने वाली सायरा ने अपनी आपबीती सुनाई तो सबकी आंखे नम हो गईं। सायरा ने बताया कि शादी के एक साल बाद ही उन्हें बांझ करार दे दिया गया था। इसके बाद भी ससुरालियों का जुल्म कम नहीं हुआ। पढ़िए आगे की कहानी...
सायरा का कहना है कि उसका वैवाहिक जीवन काफी कष्टकारी रहा। औलाद न होने के चलते विवाह के एक साल बाद ही ससुरालियों ने उसका उत्पीड़न कर घर से निकाल दिया था। समझौता हुआ तो वह फिर ससुराल आ गईं, लेकिन उनके प्रति ससुरालियों को व्यवहार नहीं सुधरा।
काशीपुर के आरटीएस डिपो में 5 जून 1975 को जन्मी सायरा ने राजकीय इंटर कॉलेज प्रतापपुर से हाईस्कूल किया और जीजीआईसी काशीपुर से इंटर किया। राधेहरि महाविद्यालय से समाजशास्त्र में एमए करने के बाद 11 अप्रैल 2002 को उसकी शादी इलाहाबाद के रिजवान से हो गई। सायरा ने बताया कि एक वर्ष बाद ही ससुराली उसे बांझ समझकर सताने लगे और उसे मायके पहुंचा दिया।
मां फिरोजा बेगम ने राजकीय चिकित्सालय में इलाज कराया। इस दौरान ससुरालियों ने उसे नोटिस भिजवा दिया। समझौते के बाद पति उसे घर ले गया। उसके बाद भी उसके रवैये में कोई बदलाव नहीं आया। दो बच्चे होने के बाद पति ने कई बार उसकी इच्छा के विपरीत गर्भपात कराया।
उसका पति रिजवान हाईस्कूल फेल था। पुन: शादी के सवाल पर सायरा ने कहा कि वह अभी इसके लिए तैयार नहीं है। वह एमबीए कर रही है, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना उसकी प्राथमिकता है। तभी वह सामाजिक और धार्मिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकेगी।