उत्तराखंड छोड़कर दूसरे राज्यों में बस चुके प्रवासियों को राज्य की किसी भी क्रिकेट टीम में शामिल होने का मौका मिलना बेहद मुश्किल है।
इसके लिए उन्हें कुछ शर्तों की कसौटी पर खरा उतरना होगा। खास बात यह है कि केवल उत्तराखंड का मूल निवासी होने की शर्त पर उन्हें ट्रायल में शामिल नहीं किया जाएगा। वहीं, राज्य का निवासी न होने के बावजूद यहां पढ़ाई या नौकरी करने वाले क्रिकेटर आसानी से टीम का हिस्सा बन सकते हैं।
बीसीसीआई गाइडलाइन के अनुसार, ट्रायल में शामिल होने के लिए खिलाड़ी का जन्म संबंधित राज्य में होना आवश्यक है। या संबंधित राज्य में तीन वर्ष तक पढ़ाई या नौकरी करने वाला खिलाड़ी भी ट्रायल में शामिल हो सकता है। बहुत से प्रवासी क्रिकेटर ऐसे हैं, जिनके परिजनों ने उनके जन्म से पहले राज्य से पलायन कर दिया था। उन क्रिकेटरों का जन्म और पढ़ाई-लिखाई दूसरे राज्यों से ही हुई है। उन्होंने क्रिकेट भी दूसरे राज्यों के लिए ही खेला है। हालांकि वह अब मूल निवास प्रमाण पत्र तैयार करवा रहे हैं, जिससे कि वह आगामी ट्रायलों में शामिल हो सकें। दूसरी ओर, जो क्रिकेटर उत्तराखंड में पढ़ाई और नौकरी कर रहे हैं, वह ट्रायल का हिस्सा बन सकते हैं।
ट्रायल में हुए शामिल
विजय हजारे ट्रॉफी के लिए हो रहे ट्रायल में हालांकि ऐसे क्रिकेटरों को भी शामिल किया गया है, जिनके पास उत्तराखंड का केवल मूल निवास प्रमाण पत्र है। राज्य क्रिकेट संचालन समिति की बैठक में यह मामला उठा था। तब मौजूदा ट्रायल में खिलाड़ियों को शामिल करने पर सहमति बनी थी। हालांकि अंतिम चयन से पहले समिति इस मामले में बीसीसीआई से बात कर मार्गदर्शन लेगी।
बड़ी संख्या में हैं प्रवासी खिलाड़ी
बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखंडी क्रिकेटर अभी दूसरे राज्यों के लिए खेल रहे हैं। इसके अलावा बोर्ड और स्कूल स्तर पर भी काफी क्रिकेटर खेल रहे हैं। उत्तराखंड का मूल निवासी होने के चलते इन्हें ट्रायल में शामिल किए जाने की उम्मीद थी। हालांकि बीसीसीआई की गाइडलाइन के चलते उनकी परेशानी बढ़ सकती है।