‘राजधानी में परिवहन विभाग नींद में है और परिवहन व्यवस्था ताक पर’। सिटी बस संचालकों के हाल इससे कुछ कम नहीं हैं। दस रूटों पर दो सौ से अधिक सिटी बसों का संचालन हो रहा है।
इनमें से अधिकांश बसों के संचालक बेखौफ मनमाने तरीके से चल रहे हैं। महिलाओं और युवतियों ने अभद्रता की घटनाएं तो आम हो गई हैं। बेलगाम संचालन की वजह से दुर्घटनाएं भी बढ़ गई हैं। बावजूद इसके परिवहन विभाग की सुस्ती नहीं टूट रही है।
टिकट नहीं, वसूलते हैं ज्यादा किराया
सिटी बसों में टिकट देकर उतनी दूरी के हिसाब से किराया लिया जाना चाहिए। लेकिन बिना टिकट दिए मनमाना किराया वसूला जाता है। कई बार यात्री ज्यादा किराया मांगने पर टिकट मांगते हैं तो उन्हें उतारने तक की धमकी दी जाती है।
महिला रिजर्व सीट कहां?
दिल्ली में कुछ माह पहले छात्रा से सिटी बस में गैंगरेप की घटना के बाद दून में महिलाओं की सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग और पुलिस ने अलग से महिला सीट रिजर्व करने के आदेश दिए थे।
धीरे-धीरे दिल्ली का मामला शांत हुआ तो दून में भी नियम दम तोड़ गया। आए दिन महिलाएं सिटी बसों में मनचलों और अव्यवहारिक कंडक्टरों की अभद्रता का शिकार होती हैं।
चालक पार्टीशन रॉड गायब
सिटी बसों में सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए चालक पार्टीशन किया गया था। बाकायदा चालक केबिन में अलग से रॉड लगाई गई थी। लेकिन सिटी बस संचालकों ने फोल्डिंग रॉड खरीद रखी है।
अगर कभी चेकिंग होती है तो रॉड लगा लेते हैं। नहीं तो वह चालक की सीट के पीछे टंगी रहती है। ओवरलोड और ज्यादा सवारी बैठाने के चक्कर में ऐसा करते हैं।
ड्रेस का नाम नहीं
परिवहन नियमों के मुताबिक चालक-परिचालक को संचालन के वक्त ड्रेस में होना चाहिए। ड्रेस पहनना तो दूर परिचालकों पर लाइसेंस तक वैध नहीं होता है।
इनकी भी सुनिए
सोमवार से कड़ा अभियान चलाकर केवल सिटी बसों की चेकिंग की जाएगी। इस दौरान बसों के साथ चालक-परिचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
- अरविंद पांडे, एआरटीओ प्रवर्तन