2007 की तबादला नीति भी नहीं हो पाई थी लागू
सचिवालय में वैसे तो 2007 में तबादला नीति लागू की गई थी, लेकिन वह प्रभावी नहीं हो पाई थी। कई अनुभागों में अधिकारी वर्षों से जमे हुए हैं। कई ऐसे हैं, जिन्हें कम काम मिल रहा है। कई सचिवों के चहेते अफसर हैं, जिन्हें वह छोड़ते ही नहीं। इन सबको को बदलने के लिए ही नई तबादला नीति लागू की गई थी।
सचिवालय संघ के पूर्व अध्यक्ष ने उठाए सवाल
सचिवालय संघ के पूर्व अध्यक्ष दीपक जोशी ने सवाल खड़े करते हुए नीति में कई खामियां बताईं। बताया कि नीति तैयार करते समय कर्मचारी प्रतिनिधियों से कोई बात नहीं हुई। मामले में अधिकारी-कर्मचारियों की अधिकतम सेवा का तो जिक्र किया गया, लेकिन न्यूनतम सेवा क्या होगी, इस पर कोई नियम तय नहीं किया है। उन्होंने कहा, सबसे पहले सचिवालय प्रशासन से ही इस नीति पर काम होना चाहिए। उन्होंने इसे लेकर मुख्य सचिव और सचिव सचिवालय प्रशासन को भी पत्र लिखा है।
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अभी तबादलों की कोई सूची जारी नहीं हुई है। जरूरत के हिसाब से तबादले बाद में किए जा सकते हैं। एक ही जगह रहने या न रहने सहित सभी नियमों पर तबादलों के समय ध्यान दिया जाएगा। -दीपेंद्र चौधरी, सचिव, सचिवालय प्रशासन