सैलानियों को अब इन खूबसूरत बागानों की सैर मुफ्त में करने को नहीं मिलेगी। एक फरवरी से यह लागू हो जाएगा।
सैलानी उत्तराखंड के चाय बागानों में अब मुफ्त में सैर सपाटा नहीं कर पाएंगे। टी-टूरिज्म को विकसित करने के मकसद से सरकार पर्यटकों से चाय बागानों में घूमने के लिए प्रवेश शुल्क लेने की योजना बना रही है। साथ ही बगीचे में पर्यटकों के रुकने के लिए समय निर्धारित होगा।
राज्य चाय विकास बोर्ड की प्रबंध परिषद की बैठक में प्रवेश शुल्क लागू करने की मंजूरी मिल गई। एक फरवरी से नैनीताल जिला के श्यामखेत(घोड़ाखाल) चाय बागान में प्रवेश शुल्क लागू करने की तैयारी है।
पहली बार नैनीताल से 12 किलोमीटर दूरी पर श्यामखेत स्थित चाय बागान में एक फरवरी से प्रवेश शुल्क लागू होने जा रहा है। नैनीताल, भीमताल व हल्द्वानी सेनजदीक होने के कारण इस चाय बागान में पर्यटकों का आना-जाना रहता है।
Kausani Tea Estate
- फोटो : globalvisiontours.
टी-टूरिज्म विकसित करने के लिए श्यामखेत बागान में इको फ्रैंडली मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। पिछले माह मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने भी चाय बागान का निरीक्षण कर पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने के लिए पर्यटकों से न्यूनतम शुल्क लेने के निर्देश दिए थे।
इस पर चाय बोर्ड ने प्रवेश शुल्क का प्रस्ताव तैयार कर प्रबंध परिषद की बैठक में रखा, जिसे परिषद ने मंजूरी दे दी। प्रवेश शुल्क के साथ बागान में रुकने के लिए समय निर्धारित किया गया। एक प्रवेश शुल्क पर पर्यटक को आधा घंटे तक ही घूमने की अनुमति होगी।
प्रदेश में टी-टूरिज्म को विकसित करने के लिए चाय बागानों में पर्यटकों से न्यूनतम प्रवेश शुल्क लिया जाएगा। चाय विकास बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूर किया गया। बागान में घूमने के लिए शुल्क के साथ रुकने की भी समय सीमा होगी। ताकि चाय बागानों को पर्यावरण की दृष्टि से नुकसान न हो।
-डी. सेंथिल पांडियन, सचिव, उद्यान
प्रवेश शुल्क के लिए ये दरें निर्धारित
money
विदेशी पर्यटक : 50 रुपये
भारतीय पर्यटक : 20 रुपये
पर्यटकों के बड़े कैमरों के साथ : 50 रुपये
फिल्म इंडस्ट्रीज (एक दिन के लिए) : 10 हजार रुपये