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कार्बेट अभी बंद, फिर भी देखने के लिए है बहुत कुछ

Mon, 02 Sep 2013 03:29 PM IST
अमर उजाला, ओमप्रकाश तिवारी, कार्बेट
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जून माह में रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ में आई आपदा की मार से प्रदेश का पर्यटन उद्योग कराह रहा है। होटल और रिजॉर्ट के अधिकतर कमरे खाली जा रहे हैं।
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आपदा का असर कार्बेट देखने आने वाले पर्यटकों पर भी पड़ा है। कार्बेट हाइडवे के मैनेजर डीएस जीना का कहना है कि आजकल उनके आधे कमरे खाली जा रहे हैं। ऐसा ही हाल अन्य होटलों का भी है। सड़क के किनारे के ढाबों और रेस्टारेंट में भी चहल-पहल कम हो गई है। लेकिन जंगल और वन्यजीव प्रेमी हर रोज यहां आ ही जा रहे हैं।

अरे, रोको-रोको देखो-देखो...हिरण
हम जानते थे कि कार्बेट बंद है और वह 15 नवंबर को खुलेगा फिर भी हम यहां आ गए। हमें बताया गया था कि कार्बेट के बाहरी क्षेत्रों में घूमा जा सकता है। यह भी कि वहां पर कई जानवरों सहित टाइगर और हाथी भी दिखाई देंगे।
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इस उम्मीद में कि टाइगर के दर्शन नजदीक से होंगे हमने सफारी की सवारी कर ली। दोपहर बाद साढ़े तीन बजे हम सफारी से सीतावनी के लिए निकले। करीब आधा घंटे चलने के बाद हम वन क्षेत्र में पहुंच गए। फिर क्या था हर किसी की निगाहें जंगल में जानवरों को खोजने लगी।






कैमरामैन अभ्युदय कोटनाला अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए बेताब थे। सफारी धीरे धीरे चलती जा रही थी। करीब आधे घंटे आगे बढऩे के बाद एक जगह दो लोग चीख पड़े अरे देखो देखो रोको रोको। उनकी आवाज सुनकर चालक ने सफारी रोक दी। फिर एक साथ कुछ लोगों ने सवाल किया कि क्या हुआ?

रोको-रोको की आवाज लगाने वाले सज्जन ने कहा कि वहां मोर था। अब कहां हैं? कई ने सवाल किए। पता नहीं कहां चला गया। इतनी तेज चिल्लाओगे तो मोर तो क्या कोई भी जानवर नहीं देख पाओगे। उन सज्जन को हमें गाइड करने वाले ने तो सलाह दी ही और भी कुछ लोगों ने सलाह दे दी।

सफारी कुछ आगे बढ़ी थी कि एक फिर रोको रोको की आवाज आई। पता चला कि इस बार सड़क के किनारे एक कछुआ दिख गया है। कछुए पर हमारे शोर का असर न होना था न हुआ। वह जिस गति से चल रहा था चलता रहा और धीरे धीरे सड़क के किनारे की झाडिय़ों में चला गया। इस बीच लोगों ने उसकी तस्वीरें खींच ली थी।

यहां से सफारी फिर आगे बढ़ी तो एक खुला मैदान दिखाई दिया। जहां मैदान खत्म होता था और जंगल शुरु वहां पर दो हिरन दिख गए। गाड़ी रोकी गई लेकिन हिरनों की दूरी इतनी थी कि उनकी तस्वीर नहीं खींची जा सकती थी।

इस तरह हम करीब सोलह किमी तक वन के अंदर तक चले गए लेकिन हमें किसी भी जानवर के दर्शन नहीं हुए। कुछ लोग निराशा से भर गए। उनका आरोप था कि उन्हें बेवजह परेशान किया गया। लेकिन यह सच नहीं था। वन में हरियाली के साथ इतने सारे साल के पेड़ों को देखना भी किसी रोमांच से कम नहीं था। इसके अलावा जंगली जानवरों को देखने का जो संयम व्यक्ति में होना चहिए था वह भी इनमें से कइयों में नहीं था।

सबके उतावलेपन से ऐसा लग रहा था वह टाइगर देखने जंगल में नहीं जा रहे हैं बल्कि किसी चिडिय़ा घर में जा रहे हैं जहां पिंजरा खोलकर उन्हें टाइगर दिखा दिया जाए। एक तो इस सड़क पर यातायात काफी चल रहा था दूसरे हमारी गाड़ी की भी आवाज काफी तेज थी। ऐसी स्थिति में चिडिय़ा घर से भी जानवर भाग जाएं। हम वापस चल दिए।

टाइगर भी दिख सकता है
अब शाम होने लगी थी। सूरज की किरणें मद्धिम हो चुकी थी। एक बार फिर हम उस स्थान पर पहुंचे जहां पहले हिरण दिखे थे। इस बार भी वहां पर हिरण झुंड में दिखे। हमारी गाड़ी रुकी तो कोटनाला सहित तीन लोग कैमरा लेकर हिरण के काफी करीब जाकर तस्वीरें खींचने लगे। उन्हें जंगल के काफी करीब तक जाते देख एक ग्रामीण जोकि वहां पर कुछ लड़कों से बातचीत कर रहा था हमसे कहा कि उन्हें वहां जाने से रोको। पीछे से जंगली सूअर हमला कर सकता है। किसी भी स्थिति में अधिक दूर तक न जाएं।



















उसकी बात मानकर हमने उन्हें आवाज लगाकर वापस आने के लिए कहा। इस बीच उनका काम हो चुका था। हिरण भी अपने करीब किसी हलचल का आभास पाकर शायद अंदर जंगल में चले गए थे।

उस ग्रामीण ने बताया कि थोड़ी देर यहां पर इंतजार करें तो टाइगर भी दिख सकता है। लेकिन हमारे में से किसी केपास भी इतना संयम नहीं था कि हम वहां रुकते और अंधेरे में टाइगर देखने का इंतजार करते। हम वहां से चल दिए। रास्ते में चार जिप्सी जिधर से हम वापस आ रहे थे उधर जाती दिखी। सभी पर्यटक थे।

हमने सोचा शायद इन्हें टाइगर दिख जाएगा। लेकिन हम रुके नहीं। वहां से चले और जहां रुके थे वहां आ गए। हमें बेशक टाइगर नहीं दिखा लेकिन हर भरे जंगल को देखना अपने आपमें अलौकिक सा लगा। यह भी संतोष था कि हमने हिरण के झुंड को देखा और एक उल्लू भी, जिसकी तस्वीर कोई नहीं खींच पाया।
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कार्बेट एक नजर
- 16 नवंबर को खुलता है कार्बेट नेशनल पार्क पर्यटकों के लिए।
- 180 के करीब टाइगर यहां पर पाए जाते हैं।
- 600 से अधिक हाथी इस क्षेत्र में पाए जाते हैं।
- 100 से अधिक गुलदार भी इस क्षेत्र में पाए जाते हैं।
- 600 से अधिक प्रजातियों के पक्षी यहां पर पाए जाते हैं
- 25 से अधिक सरीसृपों की प्रजातियां पाई जाती है।
- 50 से अधिक स्तनपायी जीवों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
- 110 प्रजातियों की पेड़ कार्बेट क्षेत्र में पाए जाते हैं।
- 1318.54 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला है कार्बेट नेशनल रिजर्व पार्क।
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