मूलरूप से पिथौरागढ़ निवासी और टीएमटी परियोजना में आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे डॉ. जीवन पांडे बताते हैं कि टीएमटी से अध्ययन के बाद ब्रह्मांड को और भी अधिक गहनता से जान सकेंगे। कहा कि इसके बाद दूसरे ग्रह (जहां जीवन की संभावनाएं हैं) की खोज वैज्ञानिकों की पहली प्राथमिकता होगी।
डॉ. पांडे ने बताया कि अभी तक जिन दूरबीनों से ब्रह्मांड का अध्ययन किया जा रहा है, उनमें ब्रह्मांड के अधिकतर तारों, ग्रहों और पिंडों की साफ तस्वीर नहीं मिलती हैं। इस कारण अधिकतर खोज अपने मुकाम तक नहीं पहुंचती थी।
टीएमटी में अडॉप्टिव ऑपटिक्स तकनीक का प्रयोग कर तारों के चारों ओर घूम रहे पिंडों की आंतरिक हलचल, उनके वायुमंडल और संरचना का गहनता से अध्ययन किया जा सकेगा। इससे पता चल सकेगा कि क्या उन ग्रहों और पिंडों में जीवन के आवश्यक कारक मौजूद हैं कि नहीं।