लक्सर से लेकर सहारनपुर तक के बीच रेलवे स्टेशनों पर गाड़ियों की प्रतीक्षा करना किसी यातना से कम नहीं है। प्लेटफार्मों की रेलवे ने लंबाई तो जरूर बढ़ाई लेकिन उस पर टीनशेड लगाना भूल गए।
कुछ स्टेशनों पर तो रेल यात्रियों को सिर छुपाने की भी जगह नहीं मिलती। गर्मी की चिलचिलाती धूप हो या फिर बरसात का मौसम। यात्रियों को परेशान होना तय है। लक्सर प्लेटफार्म नंबर एक पर तो टीनशेड है ही नहीं। इसके अलावा प्लेटफार्म नम्बर दो, तीन और चार पर जो छोटे टीनशेड हैं वह भी जर्जर हैं। अमृतसर से देहरादून जाने वाली लाहोरी एक्सप्रेस करीब 22 कोच की ट्रेन आती है। इसे ज्यादातर प्लेटफार्म नंबर एक पर ही लिया जाता है। लेकिन इस प्लेटफार्म पर कहीं भी टीनशेड नहीं है। रेल यात्रियों को भारी बारिश होने पर ट्रेन पकड़ने के लिए परेशान होना पड़ता है। वहीं, रुड़की के तीन प्लेटफार्म के पूरे हिस्से में टीनशेड नहीं है। यही हालात लगभग अन्य स्टेशनों का भी है।
ए श्रेणी वाला रेलवे स्टेशन
रुड़की रेलवे स्टेशन ए श्रेणी का है। रुड़की में आईआईटी होने के कारण यहां देश विदेश से छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। इसलिए रुड़की रेलवे स्टेशन खास मायने रखता है। विभाग ने करीब छह वर्ष पूर्व ट्रेनों में भीड़भाड़ को देखते हुए कोच के साथ प्लेटफार्म की लंबाई भी बढ़ाई थी। जिससे रेल यात्रियों के ट्रेन में चढ़ने-उतरने के लिए कोई परेशानी न हो। लेकिन टीनशेड नहीं लगाया गया है। इससे रेल यात्रियों को बरसात या फिर तपती धूप में ट्रेन पकड़ने के लिए परेशान होना पड़ता है। प्लेटफार्म नंबर एक व दो और तीन पर छोटे टीनशेड लगाए गए हैं, वह भी बारिश होने पर टपकता है। लेकिन रेलवे इसकी मरम्मत कराने की जहमत नहीं उठा रहा है।
ई श्रेणी वाले रेलवे स्टेशनों की स्थिति
लक्सर से लेकर सहारनपुर तक के छोटे स्टेशन ई श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जिसमें रायसी, लंढौरा, डोसनी, ढंडेरा, इकबालपुर, चुड़ियाला, सुनेहटी, खड़खड़ी, बलियाखेड़ी रेलवे स्टेशन हैं। इन रेलवे स्टेशनों की स्थिति दयनीय है। यहां यात्रियों के लिए रेल विभाग ने गुमटी तो जरूर बनाई है। लेकिन बारिश होने पर 4-5 यात्री ही खड़े हो सकते हैं।
हरिद्वार जिले में लक्सर तहसील उत्तराखंड राज्य का प्रवेश द्वार माना जाता है। लक्सर रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन 68 ट्रेनों का आवागवन होता है। यह रेलवे स्टेशन सी श्रेणी के अंतर्गत आता है। यहां से रेल यात्री ऋषिकेश, हरिद्वार व देहरादून जाने के लिए ट्रेनों को पकड़ते हैं। लेकिन इस रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए सिर छिपाने की जगह तक नहीं है। बरसात के दिनों में ट्रेनों को पकड़ने के लिए फजीहत झेलनी पड़ती है।
प्लेटफार्म पर टीनशेड लगाने के लिए रेल विभाग को पत्र भेजकर अवगत कराया जाएगा। शेड लगवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
- एसके वर्मा, स्टेशन अधीक्षक रुड़की
रुड़की, लक्सर समेत सभी ऐसे रेलवे स्टेशनों पर जहां शेड की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है, ऐसी जगहों पर शेड लगवाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा।
- अजय तोमर, वाणिज्य निरीक्षक